डॉक्टर के निलंबन के बाद बच्चे की उपेक्षा नहीं की गई : एम्स
अदालत में सौंपे गए एक हलफनामे में एम्स ने कहा कि हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को अगले तीन महीनों तक ऑपरेशन की जरूरत नहीं है।
एम्स ने हालांकि निलंबित हृदय रोग विशेषज्ञ ए.के.बिसोई को इस मामले के लिए बुलाने में अपनी असमर्थता जाहिर की। एम्स ने कहा कि इससे उनका निलंबन आदेश निलंबित हो जाएगा और इससे प्रशासनिक मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
अस्पताल ने बच्चे के ऑपरेशन के लिए दो अन्य शल्य चिकित्सकों के नाम भी सुझाए।
मुख्य न्यायाधीश अजित प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई गुरुवार के लिए टाल दी।
ज्ञात हो बच्चे की मां द्वारा अदालत को भेजे एक पत्र के बाद अदालत ने मंगलवार को एम्स से इस मामले पर जवाब मांगा था और कहा था कि आंतरिक झगड़े के बीच में रोगी के साथ लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। बच्चे की मां ने अपने पत्र में एम्स के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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