सीटों के तालमेल पर द्रमुक व अन्नाद्रमुक के सहयोगियों में ठनी
अन्नाद्रमुक ने हालांकि औपचारिक तौर पर यह घोषणा नहीं की है कि वह राज्य की 40 लोकसभा सीटों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और मरूमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के लिए चार सीटें छोड़ेगी, लेकिन इसकी सुगबुगाहट से ही दोनों दलों में नाराजगी है।
माकपा के एक नेता ने आईएएनएस से कहा, "अन्नाद्रमुक के साथ सीटों के तालमेल का समझौता कहीं से भी संतोषजनक नहीं है।"
एमडीएमके के नेता वाइको इस संबंध में अन्नाद्रमुक से बात कर रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी के दो सांसदों के द्रमुक में चले जाने से उनकी मांग को बल नहीं मिल रहा है।
एमडीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "वर्तमान सांसदों ला. गणेशण और गिंगि रामचंद्रन के द्रमुक में चले जाने के कारण अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जे.जयललिता हमारे छह सीटों की मांग को नजरअंदाज कर रही है।"
उधर, द्रमुक के सहयोगी दलों में भी सीटों के तालमेल को लेकर नाराजगी है। इसका नजारा कांग्रेस कार्यालय में उस वक्त देखने को मिला जब विधायक एस. जेयापॉल और जॉन जैकब के नेतृत्व में लगभग 2000 कार्यकर्ताओं ने कन्याकुमारी सीट द्रमुक को दिए जाने की चर्चा के विरोध में प्रदर्शन किया।
जेयापॉल ने संवाददाताओं से कहा, "कन्याकुमारी सीट पर 15 में 14 बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। यहां से के. कामराज जैसे करिश्माई नेता संसद पहुंचे हैं। यह सीट यदि हमें नहीं मिली तो कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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