सुनामी की भविष्यवाणी के लिए वैज्ञानिकों ने तलाशे सूत्र
न्यूकैस्टल युनिवर्सिटी के गणित के प्राध्यापक रॉबिन जॉन्सन के नेतृत्व में किया गया यह शोध वर्ष 2004 में क्रिसमस के बाद आई सुनामी से प्रेरित है। इस सुनामी के कारण इंडोनेशिया, श्रीलंका, भारत और थाईलैंड के तटीय इलाकों में भारी तबाही हुई थी।
जॉन्सन और आस्ट्रिया स्थित युनिवर्सिटी ऑफ विएना में प्राध्यापक और उनके सहयोगी एड्रियन कांस्टैंटिन ने महसूस किया कि यदि सुनामी की लंबी तरंगों के व्यवहार के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल कर ली जाए तो इस बात की भविष्यवाणी की जा सकती है कि वे कहां प्रभावी होंगी और कितनी तबाही मचाएंगी।
जॉन्सन ने कहा है, "हमने पाया कि सुनामी तरंगों की संख्या और उनकी ऊंचाई, गहरे पानी में उठने वाली शुरुआती सतह की तरंग के आकार पर पूरी तरह निर्भर होती है।"
उन्होंने कहा, "इससे यह जानना संभव है कि कोई लहर ज्वार की अवस्था में है या भाटा की अवस्था में। लहर में भाटा की स्थिति होने पर बाढ़ संभावित इलाकों में लहरों का अचानक नीचे की ओर लौट जाना सुनामी के आने का पूर्व संकेत है।"
न्यूकैस्टल द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार जॉन्सन ने कहा, "यदि लहर में ज्वार की स्थिति है तो ऐसे में कोई खतरा नहीं है। इससे आपदा का सामना करने वाले इलाकों में महत्वपूर्ण सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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