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जी-20 सम्मेलन में मनमोहन सिंह के एजेंडे में संरक्षणवाद और आतंकवाद (लीड-1)

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी पहली मुलाकात को लेकर आशान्वित हैं। दोनों नेताओं के बीच आतंकवाद, अफगानिस्तान की स्थिति और अर्थव्यवस्था पर चर्चा होने की उम्मीद है।

लंदन की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "मेजबान ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन से द्विपक्षीय मुलाकात के अलावा मैं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी पहली मुलाकात के बारे में आशान्वित हूं।"

ओबामा के साथ अपनी पहली बैठक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "ओबामा के साथ पहली बैठक द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा का एक अवसर होगी। इसके अलावा आतंकवाद, अफगानिस्तान की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।"

वैश्विक वित्तीय संकट से निपटने के लिए विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी-20 के महत्व की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में गिरती हुई निजी मांग को रोकने के लिए समन्वित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई तथा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा समन्वित वित्तीय प्रोत्साहन की आवश्यकता को रेखांकित किया।

उन्होंने वित्तीय संस्थाओं के निगरानी और निरीक्षण प्रावधानों की खामियों और कमजोरियों को दूर करने के लिए नए नियम बनाने पर भी जोर दिया।

मनमोहन सिंह ने विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को मंदी के प्रभाव से उबारने के लिए पर्याप्त स्रोत उपलब्ध कराने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन के लिए आवश्यक है कि वह ऐसे ठोस निर्णय ले जो वर्तमान मंदी को रोकने और उसे दूर करने में सहायक हो तथा दुनिया की अर्थव्यवस्था में भरोसा कायम करे।

उन्होंने विकासशील देशों को पर्याप्त अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय कोष उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया जिससे सदी के विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स) की प्रगति प्रभावित न हो।

उन्होंने शिखर सम्मेलन में चर्चा के महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया।

-विकासशील देशों को पर्याप्त वित्तीय कोष की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की आवश्यकता।

-अंतर्राष्ट्रीय पूंजी के उल्टे प्रवाह से उबरने की आवश्यकता।

- संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (सदी के विकास लक्ष्यों) को हासिल करने की गति धीमी न हो, यह सुनिश्चित करना।

-व्यापार और सेवाओं में संरक्षणवाद की उपेक्षा के साथ व्यापार वित्त आसानी से उपलब्ध कराने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार और पुनर्गठन की आवश्यकता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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