वरुण पर रासुका ठोस सबूतों के आधार पर : बसपा
मंगलवार को लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में मिश्रा ने उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा वरुण पर रासुका लगाए जाने के मामले में सफाई देते हुए कहा कि वरुण के खिलाफ रासुका की कार्रवाई ठोस सबूतों के आधार पर की गई है। बसपा सरकार प्रदेश में भय का माहौल पैदा करने वाले और लोकव्यवस्था भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी, चाहे वह कोई भी हो।
मिश्र ने कहा कि भाजपा के युवा नेता वरुण ने अपने समर्थकों और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पीलीभीत में एक वर्ग विशेष के खिलाफ नफरत फैलाई और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का काम किया। जिसके चलते शांति और व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उनके खिलाफ रासुका लगाया।
उन्होंने साफ किया कि वरुण पर जो भी कार्रवाई हुई है वह पूरी जांच और ठोस सबूतों के आधार पर ही की गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गत पच्चीस मार्च के उस फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि न्यायालय ने भी वरुण के भाषण को नफरत फैलाने वाला माना था।
उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में कानून से ऊपर कोई नहीं है। जिसने भी कानून हाथ में लेने की कोशिश की है सरकार ने उसे नहीं बख्शा है। चाहे वह बसपा का ही नेता रहा हो। मिश्र ने याद दिलाया कि बसपा अपने एक सांसद, दो मंत्रियों और दो विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटी। जरूरत पड़ने पर अपने विधायक शेखर तिवारी के खिलाफ भी रासुका लगाया।
वरुण पर रासुका लगाने जाने को गलत ठहराने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वरुण की तरफदारी करके मुलायम ने साफ कर दिया है कि उनकी भाजपा से साठगांठ है।
मुलायम पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा से साठगांठ करने का उनका पुराना इतिहास रहा है। वर्ष 2003 में भाजपा के अंदरूनी सहयोग से ही उन्होंने जोड़तोड़ कर प्रदेश में सरकार बनाई थी।
उन्होंने साफ किया कि आगामी लोकसभा चुनाव में सपा ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है, इससे साबित होता है कि उनके भाजपा के साथ संबंध कितने मधुर हैं।
कांग्रेस को वरुण के मुद्दे पर बयानबाजी न करने की सलाह देते हुए मिश्र ने कहा कि कांग्रेस के मुंह से ये बातें शोभा नहीं दे रही हैं कि बसपा और भाजपा में साठगांठ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, वह चाहती तो बाबरी मस्जिद को गिरने से बचा सकती थी, लेकिन उस समय कांग्रेस ने भाजपा को पूरा सहयोग दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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