विपक्ष ने कहा पटनायक को नहीं आती उड़िया, बीजद ने इस आरोप को बकवास बताया

पटनायक जब से राजनीति में आए हैं तभी से उड़िया न जानने के लिए उनकी आलोचना होती रही है। विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाकर उन पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें न तो उड़िया बोलना आता है न ही लिखना।

पटनायक सामान्य तौर पर रोमन लिपि में लिखे उड़िया भाषणों को पढ़ते हैं। हालांकि वे उड़िया में हस्ताक्षर करना जरूर जानते हैं।

कांग्रेस की उड़ीसा इकाई के कार्यकारी अध्यक्षों में एक भक्तचरण दास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा नहीं जानता वह कैसे राज्य पर शासन कर सकता है। हम इसे चुनावी मुद्दा बनाएंगे।"

बीजद के साथ 11 वर्षो तक गठबंधन में रहकर सत्ता भोग चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी अब इसे चुनावी मुद्दा बनाने पर जोर दे रही है। भाजपा का कहना है कि उसके बाहरी नेता आकर उड़िया बोल ले रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री अभी तक उड़िया नहीं सीख पाए हैं।

भाजपा प्रवक्ता नयन किशोर मोहंती ने कहा, "हमारी वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने 16 मार्च को एक जनसभा के दौरान अधिकांश भाषण उड़िया में दिया। वे कुछ ही घंटों में यह भाषा सीख गई लेकिन नौ वर्षो तक राज्य का मुख्यमंत्री रहने के बावजूद नवीन पटनायक उड़िया नहीं सीख पाए।"

इस बारे में बीजद के महासचिव दामोदर राउत का कहना है, "पटनायक उड़िया बोलते हैं और अंग्रेजी माध्यम से पढ़े होने के बावजूद वे जनता से उड़िया में बातचीत करने में सक्षम हैं।"

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री को उड़िया लिखना नहीं आता है और यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। जनता के लिए भावनाएं महत्वपूर्ण होती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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