स्वतंत्र भारत में सबसे पहले हिमाचल की जनजातियों ने डाला था वोट

शिमला, 31 मार्च (आईएएनएस)। स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में हिमाचल प्रदेश की जनजातियों का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि वर्ष 1951-52 के प्रथम आम चुनाव में उन्होंने देश के अन्य लोगों से महीनों पहले अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी अनिल खाची ने आईएएनएस से कहा कि किन्नौर, चंबा और लाहौल एवं स्पीति जिले के मतदाताओं ने अक्टूबर 1951 में ही अपने वोट डाल दिए थे जबकि देश के शेष भागों में दिसम्बर 1951 और फरवरी 1952 में वोट डाले गए थे। यह इसलिए किया गया था जिससे बर्फबारी के कारण जनजातीय समुदाय कहीं मताधिकार से वंचित न रह जाए।

लाहौल एवं स्पीति के 80 वर्षीय बुजुर्ग धरमू राम ने कहा कि उस समय कोई ढंग की सड़क नहीं थी और मतपेटियों को घोड़ों की पीठ पर ढोया गया था।

चांग हो गांव के एक स्कूल अध्यापक प्रेम प्रकाश ने कहा कि उनको अच्छी तरह याद है कि 30 किलोमीटर दूर स्थित एकमात्र मतदान केंद्र तक पहुंचने में उनके दादा को कितनी समस्या हुई थी। ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों ने उनका चलना मुश्किल कर दिया था।

उन्होंने कहा कि उस समय अधिकांश अनपढ़ मतदाताओं में वोट डालने को लेकर कोई खास उत्साह नहीं था। लोग शायद ही किसी उम्मीदवार का नाम जानते थे लेकिन वे पंडितजी (जवाहरलाल नेहरू) के लिए वोट देकर खुश थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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