नेपाल के शाही हत्याकांड के पीछ कौन?

पूर्व राजकुमार पारस ने कहा है कि उनके चचेरे भाई राजकुमार दीपेंद्र ने शाही महल में राज परिवार के नौ सदस्यों की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली थी.
राजकुमार पारस का भी शाही ख़िताब वर्ष 2008 में उस समय समाप्त हो गया था जब नेपाल की नई सरकार ने राजशाही को ही समाप्त कर दिया था.
पूर्व राजकुमार पारस ने सिंगापुर से प्रकाशित एक समाचार पत्र से गत रविवार को बातचीत में कहा है कि पूर्व राजकुमार दीपेंद्र अपनी पसंद की महिला से शादी करना चाहते थे जिसे शाही परिवार ने नामंज़ूर कर दिया था. इस पर दीपेंद्र बहुत ख़फ़ा थे.
पारस के अनुसार दीपेंद्र ने इस बारे में शाही परिवार के अन्य युवा सदस्यों से बातचीत की थी और हत्या काँड से क़रीब एक साल पहले शाही परिवार का तख़्त पलट करने की अपनी योजना का भी ज़िक्र किया था.
पारस के अनुसार उस समय दीपेंद्र की उस योजना को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था और किसी ने यह नहीं सोचा था कि दीपेंद्र इतना अतिवादी क़दम भी उठा सकते हैं.
बीबीसी के काठमाँडू संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि ऐसा लगता है कि पूर्व राजकुमार पारस अपने इस बयान के ज़रिए यह आभास देना चाहते हैं कि शाही हत्याकाँड में ख़ुद उनका कोई हाथ नहीं रहा है.
ग़ौरतलब है कि नेपाल की नई माओवादी सरकार ने शाही हत्याकाँड की फिर से जाँच कराने की मंशा ज़ाहिर की है.
नेपाल में बहुत से लोगों का मानना है कि पारस के पिता और नेपाल के अंतिम राजा ज्ञानेंद्र ने ही शाही परिवार के उस हत्याकाँड की साज़िश रची थी लेकिन सरकारी जाँच और उस घटना को अपनी आँखों से देखने वाले लोगों के हवाले से कहा गया था कि उस हत्याकाँड को तब के राजकुमार दीपेंद्र ने अंजाम दिया था.
दीपेंद्र की नाराज़गी
पारस ने कहा है कि वह ख़ुद हत्या वाली रात के समारोह में शामिल होना नहीं चाहता था लेकिन दीपेंद्र ने इसके लिए दबाव डालते हुए अनुरोध किया था. पारस ने यह भी कहा कि दीपेंद्र ने उस रात शराब का सेवन नहीं किया था हालाँकि उसने शराब पीने का दावा किया था.
पूर्व राजकुमार पारस जुलाई 2008 में नेपाल छोड़कर सिंगापुर चले गए थे
पारस ने उस हत्याकाँड के उद्देश्य के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि दीपेंद्र देवयानी राणा से विवाह करना चाहते थे लेकिन शाही परिवार ने उनकी इस मर्ज़ी को पूरा करने से इनकार कर दिया था जिस पर दीपेंद्र बहुत नाराज़ थे.
पारस ने कहा कि इसके अलावा दीपेंद्र नेपाली सेना के लिए जर्मनी से पचास हज़ार रायफलें ख़रीदने के एक सौदे पर बातचीत कर रहे थे लेकिन यह सौदा कामयाब नहीं हो सका जिस पर वह बहुत क्रोधित थे.
पारस का कहना है कि उस सौदे से दीपेंद्र को लगभग डेढ़ करोड़ डॉलर का फ़ायदा होता. अगर पारस की इस बात को सही मान लिया जाए तो इससे नेपाल के पूर्व शाही परिवार में भ्रष्टाचार का भी भंडाफोड़ होता है.
पारस ने कहा कि दीपेंद्र एक अन्य कारण से भी बहुत क्रुद्ध था. वो था कि उसके पिता ने 1990 के समय में राजतंत्र की निरंकुश सत्ता को समाप्त कर दिया था और उनके उस फ़ैसले पर दीपेंद्र बहुत नाराज़ था.
हालाँकि दीपेंद्र के नज़दीकी सूत्रों ने इस तरह के आरोपों पर संदेह व्यक्त किया है.


Click it and Unblock the Notifications