103 देशों के पीसी से दस्तावेज उड़ाए

चीन के इस खुफिया इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क ने भारत समेत 103 देशों के 1295 कंप्यूटरों को हैक कर जानकारियां चुराईं हैं। चीनी हैकरों ने अमेरिका में भारतीय दूतावास सहित कई देशों के विदेश मंत्रालयों और तिब्बती नेता दलाई लामा के कंप्यूटर में सेंध लगाई।
कनाडा के शोधकर्ताओं ने सर्विलांस ऑफ द तिब्बतन मूवमेंट नाम की रिपोर्ट के मुताबिक, मालवेयर के जरिए हैकर कई देशों के विदेश मंत्रालयों और दूतावासों के कंप्यूटरों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब हो गए थे। जांच टीम के मेंबर ग्रेग वॉल्टन ने कहा कि "हमें तिब्बती कंप्यूटरों में सेंध लगाने और दलाई लामा के पर्सनल ऑफिस से संवेदनशील दस्तावेज चुराए जाने के ठोस सबूत मिले हैं"।
हालांकि इस हैकिंग के पीछे चीनी सरकार का हाथ होने के बारे में पक्के सबूत नहीं मिले हैं वहीं चीन सरकार ने ऐसे आरोपों का खंडन किया है।
कनाडा के इन्फर्मेशन वॉरफेयर मॉनिटर (आईडब्ल्यूएम) के रिसर्चरों से दलाई लामा के दफ्तर ने यह पता लगाने को कहा था कि क्या निर्वासित तिब्बती सरकार के कंप्यूटर हैक किए गए हैं। आईडब्ल्यूएम ने 10 महीने की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट दी।
माना जाता है कि चीन के इस खुफिया हैकिंग नेटवर्क का शिकार ईरान, बांग्लादेश, लातविया, इंडोनेशिया, फिलिपींस, ब्रूनेई, बारबाडोस और भूटान के विदेश मंत्रालय बने। भारत, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, रोमानिया, साइप्रस, माल्टा, थाइलैंड, ताइवान, पुर्तगाल, जर्मनी और पाकिस्तानी दूतावासों के कंप्यूटरों की भी हैकिंग हुई। न्यू यॉर्क टाइम्स का कहना है कि प्रभावित देशों की संख्या के लिहाज से यह अब तक का सबसे बड़ा खुफिया ऑपरेशन है।
रिसर्चरों के मुताबिक, इस हैकिंग का मुख्य निशाना एशियाई सरकारों के कंप्यूटर थे। चीनी हैकरों ने इन कंप्यूटरों से सिर्फ अहम डेटा ही नहीं उड़ाए, बल्कि वे ऑडियो-विडियो रिकॉर्डिन्ग डिवाइस के जरिए उन कमरों पर भी नजर रखे हुए थे, जहां ये कंप्यूटर रखे थे।


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