लाहौर पुलिस अकादमी आतंकियों के कब्जे से मुक्त, 27 प्रशिक्षुओं की मौत (राउंडअप)
वाघा सीमा के समीप स्थित मनावन पुलिस अकादमी से शवों को बाहर निकालने का सिलसिला जारी है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावरों की संख्या 10-12 थी, जिसमें से कुछ पुलिस वर्दी में थे।
एक भारतीय टेलीविजन चैनल से पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने कहा, "कार्रवाई खत्म हो गई है। हमने एक निश्चित योजना के तहत काम किया।"
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी रेंजर्स और पंजाब पुलिस के कमांडो सहित सुरक्षा बलों ने सबसे पहले हमलावरों को पहली मंजिल, फिर दूसरी मंजिल और अंत में छत पर घेर लिया। इसके बाद वे असहाय हो गए।
मलिक ने कहा, "हमने 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' के तहत काम किया और लाहौर के सभी प्रमुख सुरक्षा अधिकारी इसमें शामिल थे।"
मलिक के अनुसार कार्रवाई के दौरान 52 पुलिस कर्मी घायल हो गए हैं।
कार्रवाई खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने परिसर भवन की छत पर चढ़कर हवा में गोलियां चलाइर्ं और 'अल्हा-ओ अकबर' कहते हुए जीत का जश्न मनाया।
पंजाब के गृह सचिव राव इफ्तिखार के अनुसार दो आतंकवादियों ने स्वयं को उड़ा लिया। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये आतंकी किसी संगठन या गुट से संबद्ध थे या नहीं। कुछ अधिकारियों ने एक की पहचान अफगानिस्तानी के रूप में की।
यह हमला सुबह सात बजकर 20 मिनट पर हुआ। उस वक्त प्रशिक्षु सुबह की परेड में हिस्सा ले रहे थे। हमलावरों ने ग्रेनेड से हमला कर वहां मौजूद अधिकतर निहत्थे पुलिसकर्मियों और कुछ सशस्त्र सुरक्षा बलों को अचंभे में डाल दिया।
आतंकवादियों ने प्रशिक्षण केंद्र की दीवार उड़ा दी और गोलियां बरसाते हुए परिसर में घुस गए।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर परिसर की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानते थे। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र को अपने कब्जे में कर लिया और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। हालांकि कई पुलिसकर्मी मुख्य गेट से भागने में सफल रहे। उन्होंने हमले के बारे में प्रशासन को बताया। उसके बाद सुरक्षा बलों को वहां के लिए रवाना किया गया। लेकिन उन्हें केंद्र को आतंकियों से मुक्त कराने में आठ घंटे मशक्कत करनी पड़ी।
जियो टीवी के अनुसार पुलिस अकादमी परिसर के पास एक गांव में उतरे एक हेलीकाप्टर की ओर बढ़ रहे एक हथियारबंद व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से दो ग्रेनेड भी बरामद किए गए।
एक घायल प्रशिक्षु ने जियो टीवी को बताया, "बाहरी दीवार से एक ग्रेनेड परेड ग्राउंड पर दागा गया। उसके बाद सात-आठ अतिरिक्त ग्रेनेड दागे गए। उसके बाद आतंकियों ने परिसर में दाखिल होकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। यह गोलीबारी करीब 20 मिनट तक जारी रही।"
प्रशिक्षु ने बताया, "हम लोग जमीन पर लेट गए और रेंगकर मुख्य द्वार की ओर बढ़ने लगे। वहां से हमें बचा लिया गया।"
मलिक ने इस हमले को पाकिस्तान के लिए अपमानजनक बताते हुए देशवासियों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, "यह पाकिस्तान पर हमला है। अब हमें एकजुटता दिखानी होगी, जैसा कि हमने 1965 में दिखाया था। मैं हर किसी से अपील करता हूं कि आइए हाथ मिलाते हैं।"
सन 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग हुआ था। उस जंग में भारतीय सेना लाहौर के पास तक पहुंचने में कामयाब रही थी।
मलिक ने कहा कि उन्होंने इस हमले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसे तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हमले में विदेशी हाथ होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, "हमने यह साबित किया है कि हम ऐसी स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। साथ ही हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगा।"
इससे पहले मलिक ने जियो टीवी से कहा कि लाहौर हमला, मुंबई पर 26-29 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों से मिलता-जुलता है। मुंबई हमलों में करीब 170 लोग मारे गए थे।
मलिक ने कहा, "देश में यह हमला उन ताकतों द्वारा कराया गया है जो पाकिस्तान में स्थायित्व नहीं चाहतीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक तथा हर स्तर पर एकजुटता की जरूरत है।"
मलिक ने कहा कि पाकिस्तान 'आतंकवाद की लहर' का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी प्रशिक्षित थे और आतंक को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।
मलिक ने स्वीकार किया कि जिस पुलिस प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाया गया उसके सुरक्षा प्रबंधन में कमियां थीं। परिसर की इमारतें आतंकवादी हमले रोक पाने में अक्षम थीं। उन्होंने बताया, "नई इमारतों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होंगे।"
इससे पहले गत तीन मार्च को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के समीप श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को निशाना बनाकर हमला किया गया था, जिसमें छह सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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