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लाहौर में पुलिस प्रशिक्षण केंद्र पर हमले में 22 मरे (लीड-4)

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पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने लाहौर में पुलिस अकादमी के काफी बड़े हिस्से को आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त करा लिया है। भारी गोलाबारी के बीच पुलिस और सेना के कमांडो ने इमारत के भूमि तल और पहली मंजिल के कमरों को खाली करा लिया।

वाघा सीमा से महज पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित माटावान पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के ऊपर कम से कम चार हेलीकाप्टरों को मंडराते देखा गया और निशानेबाजों ने हमलावरों के संदिग्ध ठिकानों पर निशाना साध रखा है।

लाहौर पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार 22 लोगों के मारे जाने की खबर है। जबकि द न्यूज ने खबर दी है कि इसमें कम से कम 25 लोग मारे गए और 90 से ज्यादा घायल हुए हैं। रेंजर्स के हवाले से दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि दो आतंकवादी भी मारे गए हैं।

जियो टीवी के अनुसार पुलिस अकादमी परिसर के पास एक गांव में उतरे एक हेलीकाप्टर की ओर बढ़ रहे एक हथियारबंद व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से दो ग्रेनेड भी बरामद हुए।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि करीब दस आतंकवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया और अब तक आठ धमाके सुने गए हैं।

यह हमला सुबह सात बजकर 20 मिनट पर हुआ। हमले के समय प्रशिक्षु सुबह की परेड में हिस्सा ले रहे थे।

एक घायल प्रशिक्षु ने 'जियो टीवी' को बताया, "बाहरी दीवार से एक ग्रेनेड परेड ग्राउंड पर दागा गया। उसके बाद सात-आठ ग्रेनेड और भी दागे गए। उसके बाद उन लोगों ने परिसर में दाखिल होकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। यह गोलीबारी करीब 20 मिनट तक जारी रही।"

प्रशिक्षु ने बताया, "हम लोग जमीन लेट गए और रेंगकर मुख्य द्वार की ओर बढ़ने लगे, जहां से हमें बचा लिया गया।"

पुलिसकर्मियों और पुलिस परिसर की इमारतों में छुपे बैठे हमलावरों के साथ मुठभेड़ जारी है।

टेलीविजन फुटेज में परेड ग्राउंड में पुलिसकर्मियों के शवों तथा कुछ को घुटनों और हाथों के बल रेंगते हुए गोलीबारी से बचने की कोशिश करते दिखाया गया है।

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रमुख रहमान मलिक ने 'जियो टीवी' को बताया कि लाहौर हमला, मुंबई पर 26-29 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों से मिलता-जुलता है। मुंबई हमलों में करीब 170 लोग मारे गए थे।

लाहौर में जारी हमले के बीच मलिक ने कहा, "देश पर यह हमला उन ताकतों ने कराया है जो पाकिस्तान में स्थायित्व नहीं चाहतीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक तथा हर स्तर पर तालमेल होना चाहिए।"

मलिक ने कहा कि पाकिस्तान 'आतंकवाद की लहर' का निशाना बन रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी प्रशिक्षित हैं और आतंक को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

मलिक ने स्वीकार किया कि जिस पुलिस प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाया गया उसमें सुरक्षा प्रबंध नहीं थे और वे इमारते आतंकवादी हमले नहीं रोक सकतीं। उन्होंने बताया, "नई इमारतों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होंगे।"

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मुश्ताक शुखेरा ने कहा है, "आतंकवादियों ने केंद्र के भीतर पोजीशन ले रखी है और उनसे निपटने के लिए उत्कृष्ट दस्ते को मौके पर तलब किया गया है।"

शुखेरा ने कहा, "करीब 850 प्रशिक्षुओं को सामान्यतया यहां प्रशिक्षण दिया जाता है लेकिन हमले के समय उनमें से कितने केंद्र के भीतर मौजूद थे इसकी जानकारी हमें नहीं है।"

एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों को हमलावरों को पहचानने में दिक्कत हो रही है क्योंकि उन्होंने भी पुलिस की वर्दी पहन रखी है।

अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। परंतु पाकिस्तान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने इसके लिए कबायली इलाके में सक्रिय अल कायदा और तालिबान आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया है।

माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों का हमला आरंभ होने से पहले ही कुछ आतंकवादी मौके से भाग निकलने में सफल रहे।

इससे पहले गत तीन मार्च को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के समीप श्रीलंका के क्रिकेट खिलाड़ियों को निशाना बनाकर हमला किया गया था, जिसमें छह सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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