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श्रीलंका में लड़ाई फिर तेज़ हुई

श्रीलंका में लड़ाई फिर तेज़ हुई

सेना ने कहा है कि मुल्लाईतीवू ज़िले में सुरक्षा बलों के साथ ताज़ा लड़ाई में कम से कम 15 तमिल विद्रोही मारे गए हैं.

लेकिन तमिल विद्रोहियों की समर्थक वेबसाइटों का कहना है कि तमिल लड़ाकों ने सेना के हमले के ख़िलाफ़ मज़बूत टक्कर दी है.

हालाँकि सेना और तमिल विद्रोहियों के इन अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि लड़ाई वाले क्षेत्र में पत्रकारों को भी जाने की इजाज़त नहीं है.

कोलंबो में बीबीसी संवाददाता अनबरासन एथिराजन का कहना है कि पूर्वोत्तर इलाक़े में लड़ाई और भीषण हो गई है और इसी लड़ाई के ज़रिए सेना मुल्लाईतीवू ज़िले में विद्रोहियों के बचे हुए ठिकानों पर भी क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर रही है.

श्रीलंकाई सेना ने कहा है कि इस ताज़ा लड़ाई में तमिल विद्रोहियों के अनेक ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है.

एक सैन्य प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि सेना को भी कुछ नुक़सान हुआ है लेकिन मारे गए सैनिकों की संख्या का कुछ पता नहीं चला है.

श्रीलंका सरकार ने कहा है कि सरकारी सेना ने अब तमिल विद्रोहियों को सिर्फ़ 25 वर्ग किलोमीटर से भी कम दायरे में सीमित कर दिया है.

तमिल विद्रोहियों ने इस बारे में कोई वक्तव्य जारी नहीं किया है लेकिन तमिल विद्रोहियों की समर्थक वेबसाइटों ने लिखा है कि तमिल विद्रोहियों ने सेना को मज़बूत टक्कर दी है जिसके परिणामस्वरूप सरकारी सेना को भारी नुक़सान हो रहा है.

श्रीलंका में लड़ाई में यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने लड़ाई की वजह से फँस गए हज़ारों आम नागरिकों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है.

युद्ध क्षेत्र से आम नागरिकों को निकालने वाली एक नाव भी रविवार को इस लड़ाई की चपेट में आ गई.

अंतरराष्ट्रीय रैडक्रॉस ने कहा है कि बीमार और घायल लोगों को सुरक्षित स्थानों की तरफ़ ले जा रही एक नाव पर भी गोलियाँ बरसाई गई हैं लेकिन नाव और उसके यात्रियों को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है.

ऐसा पहली बार हुआ है कि राहत जहाज़ भी इस लड़ाई की चपेट में आया है. रैडक्रॉस के श्रीलंका में एक प्रवक्ता सोफ़ी रोमानेन्स ने कहा कि उस विशाल नाव ने घायलों और बीमार लोगों को युद्ध क्षेत्र से निकालकर सरकार नियंत्रण वाले अस्पतालों में पहुँचाने का अपना मिशन जारी रखा हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने कुछ समय के लिए लड़ाई रोके जाने का आहवान किया है ताकि आम नागरिक युद्ध क्षेत्र से ख़ुद को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा सकें.

लेकिन श्रीलंका सरकार ने कहा है कि इस तरह के किसी भी अस्थाई युद्धविराम को तमिल विद्रोहियों ने ख़ुद को फिर से संगठित करने के लिए इस्तेमाल किया है.

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