उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में परिवारवाद का बोलबाला
लखनऊ, 29 मार्च (आईएएनएस)। देश को सबसे ज्यादा सांसद देने वाले उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में परिवारवाद की राजनीति का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिल रहा है।
अभी तक वंशवाद ओर परिवारवाद पर सिर्फ कांग्रेस का ही एकाधिकार माना जाता रहा है, लेकिन अब प्रवृत्ति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) और बहुजन समाज पार्टी(बसपा) ने बड़ी सहजता से आत्मसात कर लिया है।
देश में सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की 80 में से एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर मां-बेटे, पिता-पुत्र, चाचा-भतीजा, भाई-भाई रूपी राजनेताओं की जोड़ियां कब्जा जमाने की तैयारी में हैं।
परिवारवाद का सबसे बड़े उदाहरण गांधी नेहरू परिवार की सोनिया गांधी जहां रायबरेली सीट से मैदान में हैं वहीं उनके बेटे राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ रहे हैं। पीलीभीत से कई बार सांसद रहीं गांधी परिवार की दूसरी बहू मेनका गांधी ने इस बार यह सीट अपने पुत्र वरुण गांधी के लिए छोड़ दी और अब वह पास की ही आंवला सीट से लड़ रही हैं।
पिता-पुत्र की जोड़ी के रूप में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव जहां मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव कन्नौज और फिरोजाबाद से चुनावी अखाड़े में हैं।
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) सुप्रीमो एवं जाट नेता अजित सिंह बागपत से चुनावी मैदान में हैं तो उनके पुत्र जयंत चौधरी मथुरा सीट से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। इसके अलावा सपा सांसद रशीद मसूद के पुत्र सादान मसूद कैराना लोकसभा सीट से पहली बार संसद जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कई राजनेता ऐसे भी हैं जो खुद तो चुनावी समर में नहीं उतर रहे हैं, लेकिन उनके बेटे उनकी राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रमापतिराम त्रिपाठी के बेटे शरद त्रिपाठी खलीलाबाद संसदीय सीट से लड़ रहे तो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह के बेटे अनुराग सिंह मिर्जापुर लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी हैं।
किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत बिजनौर से भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा के बेटे महेश वर्मा कन्नौज से बसपा के उम्मीदवार हैं।
पूर्वाचल के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे भीष्म शंकर तिवारी बसपा के टिकट पर खलीलाबाद से चुनावी मैदान में हैं, तो छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी भी बसपा के टिकट पर ही गोरखपुर में भाजपा के दिग्गज बाहुबली योगी आदित्यनाथ का सामना करेंगे।
चाचा भतीजा के तौर पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेद्र यादव बदायूं सीट से मैदान में हैं, तो हरिशंकर तिवारी के
भतीजे गणेश शंकर पांडे भी महराजगंज लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी बसपा के टिकट पर वाराणसी और गाजीपुर से चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
चुनावी अखाड़े में राज्य के कई विधायकों की पत्नियां भी संसद पहुंचने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। फतेहपुर सीकरी से राज्य के ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय कांग्रेस के प्रत्याशी राजबब्बर को टक्कर दे रही हैं।
बसपा विधायक जयवीर चौहान की पत्नी राजकुमारी चौहान अलीगढ़ से, विजय पाल की पत्नी सुनीता सिंह शाहजहांपुर से, मुन्नवर हसन की पत्नी तबस्सुम बेगम कैरान से और जसमीर अंसारी की पत्नी कैसर जहां सीतापुर सीट से चुनावी मैदान में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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