पाकिस्तान दक्षिण एशिया में सुरक्षा संबंधी खतरे की जड़ : अमेरिका (राउंडअप)
राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुक्रवार को घोषित नई आतंकवाद निरोधक नीति को क्षेत्र विशेष पर केंद्रित बताते हुए देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल जेम्स जोंस ने संवाददाताओं से कहा, "पहली बार हम अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग-अलग देशों परंतु एक ही क्षेत्र में एक ही खतरे के रूप में देखेंगे।"
जोंस ने कहा, "हम पहले की तुलना में पाकिस्तान पर अधिक ध्यान देंगे और यह सामान्य बात है क्योंकि वहां नया खतरा उत्पन्न हुआ है।" उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान को और अधिक अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है चाहे वह सैन्य मदद हो या आर्थिक।
संवाददाताओं द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान सुरक्षा संबंधी समस्याओं के मूल में है? जोंस ने कहा, "हां"।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि अलकायदा पाकिस्तान से अमेरिका पर और आतंकवादी हमले करने की योजना बना रहा है।
उन्होंने शुक्रवार को इस संबंध में अपनी नई नीति की घोषणा करते हुए कहा था कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अलकायदा और तालिबान पर हमला कर उन्हें विघटित और नष्ट कर दिया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि यह नीति किस तरह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने में मददगार साबित होगी? सीआईए के पूर्व अधिकारी और मध्यपूर्व व दक्षिण एशिया के मामलों के विशेषज्ञ ब्रूस रिडेल ने कहा कि अफगानिस्तान की ओर से कड़ी सैन्य कार्रवाइयों और पाकिस्तान के रास्ते कूटनीतिक पहल के माध्यम से ऐसा किया जा सकता है।
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह कश्मीर मसले से अलग रहेगा जबकि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अपनी नई रणनीति में भारत तथा क्षेत्र के अन्य प्रमुख देशों को शामिल करने का इच्छुक है।
पाकिस्तान के कबायली इलाकों का हवाला देते हुए जोन्स ने कहा,"लेकिन हम दोनों देशों को विश्वास और भरोसा बनाने में मदद करेंगे ताकि पाकिस्तान अपने पश्चिम हिस्से के मसले सुलझा सके।" ओबामा और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने इन क्षेत्रों को आतंकवादियों का गढ़ करार दिया है।
जोन्स ने कहा, "लेकिन कश्मीर अलग मसला है। लेकिन हमें लगता है कि यह दौर इतना नाजुक है कि हम क्षेत्र में विश्वास और भरोसे का वातावरण तैयार करना चाहते हैं ताकि देश अल कायदा और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों की चुनौती से निपट सकें।"
उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए नया संपर्क समूह गठित करने की ओबामा प्रशासन की योजना का हवाला देते हुए कहा, "जब अमेरिका प्रयासरत है तो हम अन्य देशों से भी इनमें शामिल होकर प्रयास करने को कहेंगे।"
प्रस्तावित समूह में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो)में अमेरिका के सहयोगी, अन्य सहयोगी देश, मध्य एशियाई देश, खाड़ी देश, ईरान,रूस, भारत और चीन भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा तथा विकास चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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