झारखंड में अहम चुनावी मुद्दा बन रहा है हाथियों का उत्पात
रांची, 28 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड में हाथियों के उत्पात की वजह से मारे गए लोगों की संख्या नक्सलवादियों द्वारा मारे गए लोगों के करीब- करीब बराबर होने के कारण राज्य में आगामी संसदीय चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है।
राज्य में वन क्षेत्र करीब 30 प्रतिशत है और मानव-जानवर संघर्ष सबसे बड़ी चिंता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिक हरित क्षेत्र उनकी विपदा का कारण है। जंगल में न केवल नक्सलवादी छिपने का स्थान पाते हैं वरन हाथियों की तादाद भी बढ़ती है।
पिछले आठ वर्षो में नक्सली हिंसा में राज्य में 1500 मौते हुई हैं। इनमें 800 नागरिक और 700 सुरक्षा कर्मचारी और नक्सलवादी हैं। इसी दौरान हाथियों के हमले से राज्य में 700 लोगों की मौत हुई है।
रांची के सिली ब्लाक के सोहराई महतो ने आईएएनएस से कहा कि हाथियों की समस्या पहला चुनावी मुद्दा है। महंगाई,विकास, कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दे गौण हैं।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के राजू धनवार का कहना है कि उग्र हाथियों से हमारे जीवन को खतरा है। हाथी नियमित रूप से गांवों में आकर मकानों और खड़ी फसलों को नष्ट करके लोगों को कुचलकर मारते हैं।
सिली ब्लाक के ही गणेश बैठा ने कहा कि यदि नक्सलवादियों और हाथियों को मारने में से किसी एक को चुनने को कहा जाए तो वह हाथियों को चुनेंगे। हाथी न केवल लोगों को मारते हैं वरन खड़ी फसलों को रौंद कर अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाते हैं। हाथी अनाज भंडारों पर भी हमला करते हैं।
कई गांवों में लोग हाथियों के डर से लोग अपनी रातें पेड़ों पर बिताते हैं। कई मामलों में महिलाओं ने पेड़ों पर बनाई गई झोपड़ियों में बच्चों को जन्म दिया।
आगामी लोकसभा के चुनाव में कम से कम पांच संसदीय क्षेत्रों रांची, खूटी,हजारीबाग,चाइबासा और दुमका में हाथियों का मामला प्रमुख चुनावी मुद्दा है। राज्य के कुल 24 में से 13 जिले हाथियों की समस्या से प्रभावित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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