कोडनानी ने इस्तीफा देने के बाद समर्पण किया (राउंडअप)
गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों के सिलसिले में आरोपी ठहराए गए कोडनानी और पटेल दोनों एक साथ एसआईटी के कार्यालय पहुंचे और एक वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष समर्पण कर दिया।
इससे पहले, गुजरात उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
कोडनानी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. एच. वाघेला ने कहा, "माया कोडनानी भीड़ की अगुवाई कर रही थी लेकिन उन्होंने उसे काबू में नहीं किया। यह किसी संगठित अपराध से कम नहीं था।"
न्यायालय ने कोडनानी के वकील की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने के वास्ते समय दिए जाने का अनुरोध भी ठुकरा दिया।
इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कोडनानी से दूरी बरतते हुए इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा।
कोडनानी ने जहां कुछ भी कहने से इंकार कर दिया वहीं पटेल ने संवाददाताओं को बताया, "मैं अदालत के फैसले का सम्मान करता हूं। मुझे न्यायापालिका पर पूरा भरोसा है।"
उधर, दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता बलबीर पुंज ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "गुजरात उच्च न्यायालय का फैसला आते ही पार्टी ने उनसे इस्तीफा देने को कह दिया। उन्होंने इस्तीफा दे दिया, बाकी कानून अपना काम करेगा।"
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने हालांकि कहा कि अदालत का फैसला मंत्री के खिलाफ नहीं है और ना ही यह भाजपा के लिए शर्मिदगी भरा है।
कोडनानी का नाम सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा नारोदा गाम और नारोदा पाटिया में दंगों के लिए उकसाने वालों में शुमार किया गया है। इन जगहों पर 27 फरवरी 2002 के गोधरा कांड के तत्काल बाद दंगे भड़क उठे थे।
उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल अपनी याचिका में एसआईटी ने कहा है कि गवाहों द्वारा नाम लिए जाने के बाद से ही कोडनानी गिरफ्तारी से बच रही हैं। गवाहों ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने उस दिन मंत्री को उन इलाकों में देखा था।
गवाहों ने एसआईटी को बताया कि उन्हें धमकाया जा रहा है और मंत्री के खिलाफ आरोप वापस लेने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है।
गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में 1180 लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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