समझ बढ़ने के साथ टूट रही हैं वर्जनाएं

पिछले पांच वर्षो के दौरान देश के सात राज्यों के 94 जिलों में 134 गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करते हुए ममता ने लोगों के मन से सेक्स और सेक्सुअलिटी से जुड़ी कई भ्रामक बातों और विचारों को दूर करने में सफलता हासिल की है।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में काफी काम कर चुके इस संगठन ने स्वीडन के एसोसिएशन फॉर सेक्सुअलिटी एज्युकेशन के साथ मिलकर 'यंग पीपुल्स हेल्थ एंड डेवलपमेंट- ए रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ सेंटर्ड एक्शन अप्रोच, 2003-2008' नामक एक परियोजना चलाई।

परियोजना में विभिन्न समुदायों में लोगों के ज्ञान का स्तर और इस संबंध में उनके मन की भ्रांतियां और गलतफहमियों आदि का पता लगाया गया और उसके बाद उन लोगों को शिक्षित करके और अन्य नीतियां अपनाने के बाद इस संबंध में दोबारा मापन किया गया।

परियोजना के पहले चरण में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के 32 गांव, उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के 31 गांव और कर्नाटक में बेंगलुरू के कोरमंगला क्षेत्र की चार झुग्गी बस्तियों में युवाओं की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के क्षेत्र में काम किया गया। पाया गया कि उनकी यौन संबंधी जानकारियां अत्यंत सीमित थीं और उनके अंदर अनेक भ्रांतियां भी थीं।

इसके अतिरिक्त रेवाड़ी के ही दो शहरी और दो ग्रामीण विद्यालयों में 5,000 बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई गई जहां कक्षा आठ, नौ और 10 के पाठ्यक्रम के आधार पर तीन वर्षो के लिए यौन शिक्षा संबंधी पाठ तैयार किए गए। यह संगठन दिल्ली के तिगड़ी इलाके में युवाओं के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन कर रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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