महँगाई तीन दशक के निचले स्तर पर

सात मार्च को ख़त्म हुए हफ़्ते के मुक़ाबले महँगाई में 0.17 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महँगाई की यह दर वर्ष 1977-78 के बाद से सबसे कम है.
पिछले साल इसी समय महँगाई की दर 8.01 फ़ीसदी पर थी.
शून्य की ओर
इस साल मार्च महीने की सात तारीख़ की ख़त्म हुए हफ़्ते में महँगाई की दर 0.44 फ़ीसदी दर्ज की गई थी.
जिस तरह से महँगाई की दर घट रही है उसे देखते हुए लगता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक को अर्थव्यवस्था में गति लाने के लिए कुछ उपाय करने होंगे.
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक़ महँगाई की यह दर अब ज़ीरो या डिफ़लेशन की ओर बढ़ रही हैं यानी की एक ऐसी अवस्था जब जब उत्पादन तो हो लेकिन बाज़ार में माँग न हो.
पिछले हफ़्ते में फल, सब्ज़ियों, चावल, कुछ दालों, जौ और मक्के की क़ीमत में 0.1 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
मैदा, सूजी, तेल, आयातित खाद्य तेल, गुड़, और बिनौले के तेल की क़ीमतें बढ़ने से तैयार खाद्य पदार्थ भी महँगे हो गए हैं.


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