अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की अपील

आजकल देश में चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक दल आम आदमी को बिजली मुफ़्त में देने का वायदा कर रहे हैं. ऐसे में ग्रीनपीस इंटरनेशनल ने बिजली की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए "ऊर्जा क्रांति: भारत में ऊर्जा पर सतत दृष्टिकोण" नाम से एक रिपोर्ट जारी की है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अपने कार्बन उत्सर्जन को रोकते हुए अपने आर्थिक विकास की महत्वाकांक्षाओं को कैसे पूरा कर सकता है.
रिपोर्ट बताती है कि कैसे 2030 तक नवीकरण योग्य ऊर्जा यानी अक्षय ऊर्जा से देश की 35 फ़ीसदी बिजली की माँग पूरी की जा सकती है.
इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे देश को अनुमानित ऊर्जा ज़रूरतों का 50 फ़ीसदी हिस्सा ऊर्जा के कुशल उत्पादन, वितरण और उपयोग से पूरा किया जा सकता है.
वैश्विक आर्थिक विकास
ग्रीनपीस इंटरनेशनल के अक्षय ऊर्जा विशेषज्ञ और रिपोर्ट के मुख्य लेखक स्वेन टेस्के ने नई दिल्ली में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, "हमारी जलवायु की क़ीमत पर मिलने वाले दूसरे ऊर्जा परिदृश्यों के विपरीत हमारे ऊर्जा क्रांति के परिदृश्य बताते हैं कि जलवायु में बदलाव लाए बिना पैसा बचाने के साथ वैश्विक आर्थिक विकास को बनाए रखें."
"इस योजना को शुरू करने के लिए भारत के नेताओं को एक स्पष्ट ऊर्जा नीति बनाने की ज़रूरत है"
उन्होंने कहा, "इस योजना को शुरू करने के लिए भारत के नेताओं को एक स्पष्ट ऊर्जा नीति बनाने की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, "भारत के लिए हरित राह अपनाने का यह एक सही मौक़ा है जब वह ऊर्जा के बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है और उसके पास इस मोर्चे से विश्व का नेतृत्व करने के लिए मानव और बौद्धिक पूंजी भी है."
उन्होंने ग्रीनपीस की ऊर्जा क्रांति रिपोर्ट के साथ भारत की हरित तकनीकों को अपनाने के आर्थिक फ़ायदों और उनसे जु़ड़ी स्थितियों पर प्रकाश डाला.
यूरोपीय अक्षय ऊर्जा परिषद के नीति निदेशक ओलिवर शाफ़र ने इस रिपोर्ट का वैश्विक परिदृश्य दर्शाते हुए कहा, "अक्षय ऊर्जा का वैश्विक बाज़ार वर्ष 2050 तक दोगुनी दर प्राप्त कर सकता है और आज के जीवाश्म ईँधन उद्योग को पछाड़ सकता है."
प्रतिस्पर्धा
उन्होंने कहा, "वर्तमान में अक्षय ऊर्जा का विकासशील बाज़ार 70 अरब डॉलर का है जो हर तीन सालों में दोगुना हो रहा है और आर्थिक पैमाने की वजह से पवन ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा पहले ही पारंपरिक ऊर्जा शक्ति के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही हैं."
उनके अनुसार, "लगभग वर्ष 2015 के बाद से हमें भरोसा है कि अक्षय ऊर्जा दूसरे सभी क्षेत्रों के मुक़ाबले सबसे कम लागत वाली ऊर्जा क्षमता होगी."
भारत के लिए हरित राह अपनाने का यह एक सही मौक़ा है जब वह ऊर्जा के बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है और उसके पास इस मोर्चे से विश्व का नेतृत्व करने के लिए मानव और बौद्धिक पूंजी भी है स्वेन टेस्के
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उन्होंने कहा, "इस वैश्विक ऊर्जा शक्ति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा तकनीक की नहीं बल्कि राजनीतिक इच्छा की है."
ग्रीनपीस इंडिया के राजनैतिक और व्यापारिक सलाहकार श्रीनिवास कृष्णास्वामी ने कहा, "आज की आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में अक्षय ऊर्जा में निवेश करना हर हालत में विजय पाने जैसा है. यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहतरीन है, अर्थव्यवस्था के लिए बेहतरीन है और पर्यावरण के लिए बेहतरीन है."
उन्होंने कहा, "वर्ष 2030 के बाद अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों में किसी भी ईंधन लागत के बिना ऊर्जा उत्पादन की क्षमता होगी जिससे बड़ी संख्या में नौकरियाँ उपलब्ध होंगी और यही पूरी दुनिया को मंदी से उबार सकता है."
उन्होंने कहा कि यह बिजली के बिना जीवन गुज़ार रहे 60 करोड़ भारतीयों को भी तत्काल और विश्वसनीय बिजली प्रदान कर सकता है.
उन्होंने कहा, "आज पर्यावरण विज्ञान हमें बता रहा है कि जलवायु में गर्मी बढ़ने का ख़तरा पहले के अनुमानों से ज़्यादा भयंकर है और आज हमारी पीढ़ी ही अंतिम है जिसके पास इससे बचने का मौक़ा है."
इस मौक़े पर मौजूद टाटा बीपी सोलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केएच सुब्रह्मण्यम, भारतीय पवन ऊर्जा संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी सुब्रह्मण्यम, और आईआरईडीए के निदेशक डॉ देबाशीष मजूमदार भी मौजूद थे.


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