डॉलर के प्रभुत्व का अंत होगा?

सबसे अहम बात यह है कि चाइनीज सेंट्रल बैंक भी उन उत्साहियों की सूची में शामिल हो गया है जो वैश्विक मुद्रा चाहते हैं। उसके गवर्नर झाऊ शियाओचुन ने हाल ही एक आलेख लिखा है जिसमें सारी दुनिया के लिए एक समान मुद्रा की जरूरत पर जोर दिया गया है। उनका मानना है कि यह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बुनियादी जरूरतों मे से एक है।
बीस देशों के नेताओं का एक समूह इसी मुद्दे पर आगामी दो अप्रैल को लंदन में एक साथ होगा, जहां वे इस बात पर चर्चा करेंगे कैसे मौजूदा संकट से वैश्वविक अर्थव्यवस्था को उबारा जा सकता है।
हालांकि कूटनीतिक तौर पर यह माना जा रहा है कि ग्लोबल करेंसी से संबंधित चीनी बयान अमेरिका पर दबाव रखने के लिए और बातचीत के दौरान और अधिक लाभ प्राप्त एक चाल हो सकती है।
दरअसल डॉलर का प्रभुत्व विश्व की आर्थिक शक्तियों के लिए खतरा बनता जा रहा है। हालांकि यह सच है कि एक वैश्विक मुद्रा की स्थापना आसान नहीं है। यह सभी देशों में सार्वजनिक ऋण और मुद्रा स्फीति के समान स्तर पर काफी हद तक निर्भर करता है, जो कि मुश्किल साबित होगा मगर चीन के कदम को देखते हुए यह दिलचस्प भी होगा।


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