मंदिर-मस्जिद की नहीं, मैं विकास की बात की करता हूं : शत्रुघ्न सिन्हा (लीड-1)
बिहारी बाबू ने कहा कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसे भाषण देने से बचना चाहिए, जिससे कि किसी भी धर्म या संप्रदाय के लोगों को दुख हो। उन्होंने कहा कि भाजपा और जनता दल युनाइटेड (जदयू) के गठबंधन में यह चुनाव लड़ा जा रहा है जिसका अलग एजेंडा है। उनका मानना है कि जब भाजपा खुद सत्ता में आएगी तो एजेंडा बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार को मजबूत करने के लिए हम सबों को काम करना होगा। बुधवार को पत्रकारों के साथ चर्चा करते हुए सिन्हा ने भाजपा के बड़े नेताओं को पटना साहिब से टिकट देने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी मंशा है कि वे भाजपा के बड़े नेताओं तथा बिहार की तमाम जनता की कसौटी पर खरा उतरें।
उन्होंने इस आरोप को सिरे से खरिज कर दिया कि वे बिहार कम आते हैं। उन्होंने कहा कि उनके मित्र अमिताभ बच्चन 30 वषरें बाद इलाहाबाद जाकर चुनाव लड़े थे जबकि मैं एक वर्ष में 30 बार बिहार आता हूं।
उन्होंने कहा कि देश को आज लालकृष्ण आडवाणी जैसे प्रधानमंत्री की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है केवल वे दिखावे के लिए प्रधानमंत्री हैं।
उन्होंने अभिनेताओं के राजनीति में आने के विषय पर पूछने पर कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है परंतु उन्होंने यह भी कहा कि आज अधिकतर लोग उसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो रहे हैं जो सत्ता में है या जो सत्ता के करीब है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि जैसे अभिनेता की शुरुआत स्टेज से होती है उसी तरह राजनीति की शुरुआत विपक्ष से होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि मैंने भाजपा में रह कर राजनीति सीखी है और आज भी भाजपा में ही हूं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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