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बेंगलुरू के युवा सुरक्षित नौकरी के लिए वोट देंगे

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बेंगलुरू, 25 मार्च (आईएएनएस)। भारत के आईटी हब में इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई कर रहे जिन सैकड़ों युवाओं ने वैश्विक वित्तीय संकट का अनुभव किया है, उन सभी ने इस बार इसी मुद्दे पर एकजुट होकर वोट देने का निश्चय किया है। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव में उसी को वोट दिया जाएगा, जिसके पास आर्थिक मंदी से उबरने की सर्वश्रेष्ठ योजना होगी।

इस वर्ष कैंपस प्लेसमेंट के दौरान बेंगलुरू के इन युवाओं में से कुछ को ही नौकरियां मिल पाईं और जिन्हें नौकरी मिली भी उन्हें मनमाफिक वेतन नहीं मिला है। इन युवाओं के बीच इन दिनों लोकसभा चुनाव चर्चा के केंद्र में है।

काफी की दुकानों और लोकप्रिय सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली चर्चाओं में सिर्फ एक ही मुद्दा छाया हुआ है। मुद्दा यह कि सिर्फ सही प्रत्याशी को वोट देने से ही भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

राष्ट्रीय विद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्टॉनिक्स की अंतिम वर्ष की एक छात्रा गीतिका राठौर (21) (बदला हुआ नाम) को कैंपस रिप्लेसमेंट के दौरान नौकरी नहीं मिल पाई है।

लेकिन जो गीतिका पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान वोट को लेकर उदासीन थी, वह इस बार लोकसभा चुनाव में न सिर्फ वोट देने को लेकर गंभीर है, बल्कि उसने सही प्रत्याशी को वोट देने का निश्चय किया है।

उसके मित्र सिद्धराज गोविंदराज (23) (बदला हुआ नाम) भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरू (आईआईएम-बी) के छात्र हैं। गोविंदराज का कहना है कि वह उसी पार्टी को वोट देंगे जिसके पास भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से जिंदा कर पाने की संभावना होगी।

सिद्धार्थ ने कहा, "न सिर्फ नए स्नातकों को नौकरियां हांसिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि आईटी और वित्तीय क्षेत्रों में कई सारे लोगों को अपनी रही-सही नौकरियों से भी हाथ धोना पड़ा है।"

आर्थिक मंदी की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष कैंपस में की जाने वाली नियुक्तियों के तहत आईआईएम-बी के 260 छात्रों को नौकरी पाने में लगभग 10 दिन लग गए। जबकि पिछले वर्ष कैंपस नियुक्ति के शुरुआती दिन ही 256 छात्रों के पूरे बैच को नौकरी मिल गई थी और इनमें से आधे छात्रों को काफी लाभकारी नौकरियां मिली थीं।

चूंकि भारतीय आईटी और बीपीओ पेशेवरों में से 40 प्रतिशत लोग बेंगलुरू में काम करते हैं, लिहाजा नौकरियों के खोने के मामले में बेंगलुरू सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नेस्कॉम) के अनुसार वर्ष 2007-08 के दौरान भारतीय आईटी और बीपीओ उद्योग में 20 लाख लोगों को नौकरियां मिली थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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