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तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस असमंजस में

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हैदराबाद, 25 मार्च (आईएएनएस)। तेलंगाना को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक ताकतों का ध्रुवीकरण आंध्रप्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए एक अहम मुद्दा होगा। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दबाव में आ गई है।

लगभग सभी विपक्षी पार्टियां तेलंगाना के समर्थन में सामने आ गई हैं। केवल सत्ताधारी कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है, जो अभी तक इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ नहीं कर पाई है, जबकि चुनाव दरवाजे पर दस्तक दे चुका है।

पार्टी की राज्य इकाई के चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया गया है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह सरकार द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस मुद्दे पर कोई कदम उठाएगी।

लेकिन राज्य के वित्त मंत्री के.रोसैया के नेतृत्व वाली इस समिति का गठन पिछले फरवरी महीने में आहूत विधानसभा सत्र के अंतिम दिन किया गया था। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है।

हालांकि मुख्यमंत्री वाई.एस.राजशेखर रेड्डी ने राज्य की मुख्य विपक्षी तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) की आलोचना के जवाब में अपनी सरकार का बचाव किया है।

टीडीपी अपने पूर्व दृष्टिकोण के ठीक विपरीत अब अलग तेलंगाना राज्य की मांग और इस मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के पक्ष में आ खड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री रेड्डी ने मंगलवार की शाम संवाददाताओं से कहा, "हमें तेलंगाना के गठन में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हम इस मुद्दे को उठाई गई मांग के अनुसार हल करना चाहते हैं। इसीलिए हमने इस समिति का गठन किया है।"

तेलंगाना क्षेत्र में, हैदराबाद सहित 10 जिलों की स्थितियां वर्ष 2004 के चुनाव के बाद नाटकीय रूप से बदल गई हैं।

जिस टीआरएस का पिछले चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन था, वह अब टीडीपी के नेतृत्व वाले चार पार्टियों के गठबंधन का हिस्सा है।

टीडीपी 1982 में अपने गठन के समय से ही राज्य के बंटवारे का विरोध कर रही थी। लेकिन पिछले वर्ष आश्चर्यजनक ढंग से वह अलग तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में आ गई। संभवत: वह अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी इस वादे को शामिल करेगी।

टीडीपी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने भी इस मांग का समर्थन किया है, जबकि मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) छोटे राज्यों के खिलाफ अपनी विचारधारा पर अडिग बनी हुई है।

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी की पार्टी प्रजा राज्यम ने भी सत्ता में आने पर अलग तेलंगाना राज्य बनाने का वादा किया है।

तेलंगाना क्षेत्र, राज्य विधानसभा में 294 सदस्यों में से 119 सदस्यों को चुन कर भेजता है, जबकि राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें इस क्षेत्र में आती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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