दुनिया भर में कहीं नैनो की तारीफ, तो कहीं उठे सवाल (लीड-1)
टाइम मैगजीन से लेकर न्यूयार्क टाइम्स तक ने इससे संबंधित खबर को प्रमुखता से छापा है।
टाइम मैगजीन ने 'द वर्ल्ड्स चीपेस्ट कार डेब्यूस इन इंडिया' नामक आलेख में लिखा है कि किस तरह छह वर्ष के परिश्रम के बाद भारत के सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने आम आदमी की कार पेश की है। लेख में रतन टाटा के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से यह कार एकदम उपयुक्त है।
'द न्यूयार्क टाइम्स' ने 'व्हील्स - नट्स एंड बोल्ट्स ऑफ व्हाटेव्हर मूव्स यू' नामक कॉलम में लिखा है, "नैनो को जनता कार का नाम दिया गया है क्योंकि इसकी शुरुआती कीमत काफी कम होने के कारण अधिक से अधिक लोग इसे खरीद सकेंगे।"
कनाडा के प्रमुख समाचार पत्र 'द नेशनल पोस्ट' के मुताबिक टाटा मोटर्स ने नैनो के संभावित खरीदार के रूप में भले ही भारत के लाखों मोटरसाइकिल और स्कूटर सवारों पर निगाहें जमा रखीं हों लेकिन कंपनी 2011 तक वैश्विक बाजार के कुछ हिस्से पर कब्जा करने की मंशा भी रखती है।
समाचार पत्र के मुताबिक दुनिया भर में छाई इस विश्वव्यापी मंदी के बीच नैनो एक क्रांतिकारी उत्पाद के रूप में सामने आ सकती है।
इसके साथ ही पत्र ने कुछ सवाल भी उठाए हैं जैसे कि बेहद कम कीमत होने के कारण कहीं यह कार विकासशील देशों में बढ़ते शोर और वायु प्रदूषण का कारण न बन जाए। साथ ही इसमें एयरबैग्स और एंटीलॉक ब्रेक न होने को लेकर इसके सुरक्षा मानकों पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं।
इस बीच एक आस्ट्रेलियाई वाहन विशेषज्ञ ने नैनो की आलोचना करते हुए कहा कि इससे दुनिया भर में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाएगा।
'व्हील्स' मैगजीन के फीचर संपादक जॉन कैडोगान ने एबीसी रेडियो को बताया कि नैनों की लांचिंग के बाद भारत में कारों की संख्या अचानक बढ़ने से कार्बन डाइआक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ेगा जिसका पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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