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पुलिस का सौम्या और जिगिशा की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा(लीड-3)

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जिगिशा का शव गत शुक्रवार को बरामद किया गया था जबकि सौम्या की गत 30 सितंबर को हत्या कर दी गई थी।

पुलिस ने दावा किया है कि दोनों ही हत्याओं को इन्हीं लोगों ने अंजाम दिया। दोनों ही महिलाओं की हत्या आधी रात के बाद ड्यूटी से लौटते समय की गई थी।

इन हत्याओं से राजधानी में कामकाजी महिलाओं विशेषकर महिला पत्रकारों या कॉल सेंटर में रात्रि पालियों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया था।

हत्या में प्रयुक्त हथियार और वाहन बरामद करने का दावा करते हुए पुलिस ने कहा है कि उसके पास दोषियों के खिलाफ 'पर्याप्त सबूत' हैं।

पुलिस के अनुसार जांच से इस बात का खुलासा हुआ कि दोनों हत्याएं समान तरीके से की गई हैं। इससे यह यकीन हुआ कि दोनों ही हत्याओं के पीछे एक ही गिरोह का हाथ है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बताया,"कत्ल की दोनों गुत्थियां सुलझ गई हैं। आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमने कत्ल में इस्तेमाल किए गए हथियार और वाहन भी जब्त कर लिए हैं। उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं।"

गिरफ्तार किए गए चारों व्यक्तियों की शिनाख्त मदनगीर निवासी रवि कपूर, मसूदपुर निवासी बलजीत मलिक, लाडो सराय निवासी अमित कुमार शुक्ला और मुनीरका के अजय के रूप में की गई है। दक्षिण दिल्ली में वारदात करने वाले इस गिरोह का पांचवां सदस्य अभी तक फरार बताया गया है। गिरोह का सरगना रवि है। पुलिस का आरोप है कि वह पहले कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।

सौम्या (25वर्ष) गत 30 सितंबर को तड़के करीब 3.30 बजे दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज क्षेत्र में अपनी कार में मृत पाई गई थी।

जिगिशा घोष(28 वर्ष) मंगलवार को नोएडा स्थित अपने कार्यालय गई थी और लौटकर नहीं आई। शुक्रवार रात फरीदाबाद पुलिस ने उसका शव सूरजकुंड से तीन किलोमीटर की दूरी पर बरामद किया।

जिगिशा से संबंधित घटनाओं का क्रम बताते हुए दिल्ली के पुलिस आयुक्त वाई.एस. डडवाल ने कहा, "वह काम से तड़के सवा चार बजे लौटी। वह वसंत विहार में सीपीडब्ल्यूडी कॉलोनी स्थित अपने घर से महज तीन मीटर दूरी पर थी और मोबाइल फोन पर बात कर रही थी। तभी रास्ता पूछने के बहाने गिरोह के सदस्यों ने उसे जबरन कार में घसीट लिया। उसके बाद उन्होंने उसका एटीएम कार्ड छीन लिया और महिपाल पुर से 20,000 रुपये निकलवाए।"

उन्होंने बताया कि उसके बाद गिरोह के लोग जिगिशा को साकेत ले लाए और वहां से फिर उन्होंने पांच हजार रुपये निकवाए। उसके बाद वे सूरजकुंड चले गए। उन्होंने जिगिशा से बताया कि वह उसे मुक्त कर देंगे लेकिन बाद में पहचाने जाने से डर से उन्होंने उसका कत्ल कर लाश ठिकाने लगा दी।

डडवाल ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने एटीएम से निकाले गए पैसे सरोजनी नगर और साकेत के बाजारों में खर्च करने की कोशिश की। साकेत के एटीएम की सीसीटीवी फुटेज से एक कांस्टेबल ने बलजीत मलिक को पहचान लिया।

डडवाल ने बताया कि गिरोह के लोगों को नेल्सन मंडेला मार्ग से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि गिरोह के लोगों की सेंट्रो कार पर बहुत से वरिष्ठ अधिकारियों से स्टिकर चिपके थे।

सौम्या की हत्या से जुड़े घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए डडवाल ने बताया कि सौम्या को शिकार बनाते समय गिरोहबाजों ने शराब पी रखी थी। उन्होंने बताया, "आरोपी अमित के यहां बैठकर शराब पीने के बाद अजय को उसके घर छोड़ने जा रहे थे। रास्ते में वसंत विहार प्रिया कांप्लेक्स के सामने प्रिया की कार उनके सामने से गुजरी। अमित ने उन्हें पीछा करने को कहा। जब वे उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे तभी रवि ने देसी पिस्तौल निकाल उसे बहुत कम फासले से गोली चला दी। गोली सौम्या के सिर में लगी। इसके बाद वे वहां से चंपत हो गए।"

पुलिस ने सौम्या के कत्ल में इस्तेमाल हथियार और खाली कारतूस बरामद करने का दावा किया है।

सौम्या के पिता एम. के. विश्वनाथन ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मामले की छानबीन के तरीके से मैं संतुष्ट हूं। मुझे पुलिस के प्रयासों पर पूरा भरोसा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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