कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद बढ़े

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के साथ तालमेल नहीं हो पाने के बाद राजद ने लोक जनशक्ति पार्टी के साथ बिहार के 40 में से 37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी.
दोनों दलों ने तीन सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी थीं. इसके बौखलाई कांग्रेस पार्टी ने भी बिहार की 37 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी.
यूपीए के दो प्रमुख घटक दलों के बीच बढ़े तनाव के बीच लालू प्रसाद यादव ने रविवार को बिहार में छोड़ी गई तीन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा कर दी.
यूपीए को बनाए रखने के लिए आरजेडी को अगर कोई क़ुर्बानी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटेगी. क्योकि सांप्रदायिक ताक़तों को बाहर रखना है इसलिए चुनाव प्रचार में हमारा निशाना कांग्रेस नहीं बल्कि सांप्रदायिक ताक़ते होंगी. लालू प्रसाद यादव
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हालाँकि दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में लालू ने कहा कि चुनाव के बाद उनका दल यूपीए के ही साथ रहेगा. उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि तीसरे मोर्चे से उनका कोई रिश्ता न तो है और न रहेगा.
लालू यादव ने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियां सभी प्रदेशों में अपना मज़बूत जनाधार रखती हैं, इसलिए कोई भी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी अपने दम पर केंद्र में सरकार नहीं बना सकती है.
गठबंधन मक़सद
लालू यादव ने कांग्रेस की उस पेशकश को ठुकरा दिया जिसमें कांग्रेस ने लालू और रामविलास पासवान के सामने अपने उम्मीदवार नहीं उतारने की बात कही थी. राजद नेता ने कहा, "क्योंकि कांग्रेस को बिहार में अपना संगठन बनाना है तो वो सभी जगहों पर चुनाव लड़ ले."
राजद नेता ने कहा कि किसी भी क़ीमत पर भाजपा, आरएसएस, बजरंग दल, नरेंद्र मोदी या विश्व हिंदू परिषद को मिलकर सत्ता पर क़ाबिज़ नहीं होने दिया जाएगा, क्योंकि देश की जनता सांप्रदायिक ताक़तों को स्वीकार नहीं करेगी.
यूपीए की एकता पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू यादव ने कहा, "इसे बनाए रखना मेरा दायित्व है. यूपीए को बनाए रखने के लिए आरजेडी को अगर कोई क़ुर्बानी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटेगी. क्योकि सांप्रदायिक ताक़तों को बाहर रखना है इसलिए चुनाव प्रचार में हमारा निशाना कांग्रेस नहीं बल्कि सांप्रदायिक ताक़तें होंगी."
लालू ने कहा कि चुनाव के बाद वो यूपीए के साथ सरकार बनाएंगे, साथ ही उन्होंने मनमोहन सिंह को अगले प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पसंद भी बताया.


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