भागवत होंगे नए आरएसएस प्रमुख

मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नए प्रमुख होंगे. अब तक संघ में नंबर दो रहे भागवत वर्तमान प्रमुख के सुदर्शन का स्थान लेंगे. संघ में अब तक नंबर दो रहे मोहन भागवत उनका स्थान लेंगे.
नागपुर में हो रही संघ की वार्षिक बैठक में यह परिवर्तन होगा. 56 वर्षीय मोहन भागवत को एक सख़्त तेवरों वाला नेता माना जाता है.
हालांकि वे संघ के सिद्धांतों के प्रति समर्पित नज़र आते हैं लेकिन वे समकालीन विषयों पर व्यावहारिक निर्णयों के लिए भी जाने जाते हैं.
पहले नए आरएसएस प्रमुख का चुनाव तभी किया जाता था जब वर्तमान प्रमुख का निधन हो जाता था लेकिन रज्जू भैया के समय से यह नियम बदला गया, जब के सुदर्शन ने प्रमुख का पद संभाला. के सुदर्शन ने वर्ष 2000 में आरएसएस प्रमुख का पद संभाला था. मोहन भागवत के प्रमुख बन जाने के बाद भैया जोशी संघ के नंबर दो नेता होंगे.
भाजपा की मातृ संस्था
सुदर्शन के कार्यकाल में आडवाणी को भाजपा अध्यक्ष का पद छोड़ना भी पड़ा. आरएसएस के नेता इसे एक सांस्कृतिक संगठन मानते हैं जो हिंदू राष्ट्रवाद की हिमायती रही है.
जिसकी राजनीतिक इकाई भारतीय जनता पार्टी है. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठन की मातृ संस्था भी आरएसएस है. भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम आमतौर पर आरएसएस से तय होते रहे हैं हालांकि भाजपा इससे इनकार करती रही है.
हालांकि वर्ष 1998 में साझा सरकार चलाने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के गठन के बाद से भाजपा पर संघ की नीतियों का असर कम दिखने लगा है.
जनसंघ के ज़माने से लेकर भाजपा तक आरएसएस और पार्टी के बीच कई बार तनाव दिखता रहा है लेकिन दोनों का रिश्ता अटूट बना हुआ है.
कभी दत्तोपंत ठेंगड़ी अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता को घटिया राजनीतिज्ञ कह देते हैं तो कभी आरएसएस के मंच से यशवंत सिन्हा जैसे नेता को अपराधी क़रार दिया जाता है.
लालकृष्ण आडवाणी को संघ का प्रिय नेता माना जाता रहा है लेकिन पाकिस्तान में जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले उनके बयान के बाद से संघ की नज़र आडवाणी के प्रति भी टेड़ी हो गई थी.
इन सब के बावजूद भाजपा की कार्यकारिणी में संघ की ओर से एक महासचिव की नियुक्ति की परंपरा जारी है और गुरुपूर्णिमा को भाजपा के सभी बड़े नेता नियमित रुप से संघ मुख्यालय पहुँचते रहे हैं.


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