विवादास्पद बयान के बाद बदलेगी स्थिति?

अपने भाषण की टेप रिकॉर्डिंग के साथ छेड़-छाड़ का दावा किया, उसकी जाँच की मांग की. लेकिन हिंदू हितों की झंडाबरदारी की जिस पहल का दावा उन्होनें कथित तौर पर पीलीभीत में किया था, उससे पीछे न हटे.
उन्होंने कहा, "जब भी कोई व्यक्ति हिंदू समुदाय के सम्मान की बात उठाता है उसे सांप्रदायिक करार दिया जाता है, यह एक राजनीतिक साज़िश है."
लगभग उसी तरह के शब्द, जिसका इस्तेमाल शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे करते रहे हैं या विवादित बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि तोड़े जाने के दौर के लालकृष्ण आडवाणी करते थे या जिसकी उम्मीद वर्ष 2002 में गुजरात दंगों के बाद 'हिंदू हृदयसम्राट' करार दे दिए गए नरेंद्र मोदी से की जाती है.
हिमायत
लेकिन यहाँ तो मामला इंदिरा गांधी के पोते और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के परपोते का है. वे जवाहर लाल नेहरू, जिन्होंने सारी ज़िंदगी फ़िरकापरस्ती का सख़्ती से विरोध किया और मुल्क की गंगा जमुनी संस्कृति, ख़ासतौर पर अल्पसंख्यकों के हकों की, हिमायत की.
हालाँकि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले, शाहबानो केस, दिल्ली के सिख दंगों की रोशनी में एक वर्ग नेहरु- गांधी परिवार के एक और वारिस राजीव गाँधी की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाता है.
वरुण गांधी ने पहले से तैयार एक बयान मीडिया के सामने पढ़ा, जिसमें कहा गया कि उनके भाषण के टेप के साथ छेड़छाड़ की गई और फिर वही टेप टीवी चैनलों पर दिखे, भाषण दिए जाने के 12 दिनों के बाद.
उन्होनें कहा कि उन्हें मुसलामानों के ख़िलाफ़ कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है, मगर वह उनके शब्द नहीं क्योंकि उसके कुछ शब्द काट दिए गए हैं.
उदाहरण के तौर पर उन्होनें कहा की वोट कटुओं का साथ मत दो, इसमें से वोट शब्द को उड़ा दिया गया और वही लोगों को दिखा.
माहौल
अपने भाषण में कथित तौर पर मुसलामानों को पकिस्तान भेजे जाने की सिफ़ारिश करने और हिंदुओं की तरफ उठे हर हाथ को काट देने की बात कहने वाले वरुण गाँधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सीमांत इलाक़े में बसे उनके चुनाव क्षेत्र में भय का माहौल है, एक समुदाय विशेष के लोगों के ख़िलाफ़ 400 फ़र्ज़ी केस दर्ज किए गए हैं, गाँवों के प्रधान को डराया-धमकाया जाता है, इसीलिए "मैं उनकी रक्षा और सम्मान में खड़ा हुआ हूँ."
वरुण गांधी तीन चार साल पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए. जिसकी सदस्य उनकी माँ मेनका गांधी पहले से ही हैं. वरुण गांधी को पार्टी में न कोई अहम ओहदा मिला और न ही अबसे पहले कहीं चुनाव लड़ने का अवसर.
राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है अब शायद हालत दूसरे हों, कम से कम इस बयान के बाद तो ज़रूर.
"मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं हिंदू हूँ. लेकिन इससे पहले भारतीय हिंदुत्व का मतलब है सबके लिए न्याय, सम्मान और सबको समाहित यानी एक साथ करके चलना."


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