उड़ीसा में हिंदू नेता की हत्या

प्रभात पाणिग्रही पर रुधिगामा गाँव में लगभग 15 लोगों ने हमला कर दिया और उन्हें गोली मार दी.
हिंदू कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनकी हत्या अधिकारियों, ईसाइयों और माओवादियों की साँठगाँठ का नतीजा है.
ये एक तरफ़ राज्य सरकार और दूसरी तरफ़ ईसाइयों और माओवादियों के बीच साँठगाँठ से हुआ है. माओवादियों को हिंदू हितों के लिए काम करने वालों को मारने की खुली छूट दी गई है हिंदू नेता सुभाष चौहान
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पिछले साल कंधमाल में ही हिंदू नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद पूरा ज़िला सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया था.
सांप्रदायिक हिंसा के मामले में ही प्रभात पाणिग्रही गिरफ़्तार किए गए थे और पिछले शनिवार को ही उन्हें रिहा किया गया था.
माओवादियों ने 14 लोगों की सूची जारी कर कहा था कि ये उनके निशाने पर होंगे. इनमें पाणिग्रही का नाम भी था.
साँठगाँठ का आरोप
कंधमाल के पुलिस अधीक्षक एस प्रवीण कुमार ने बताया, "हमारे सारे विकल्प खुले हुए हैं. पूरी जाँच के बाद ही हम हत्यारों के बारे में कुछ कह पाएंगे."
पिछले साल कंधमाल में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी
जिस गाँव में हत्या हुई, वहाँ पहुँचने में पुलिस को काफ़ी समय लगा क्योंकि हमलावरों ने घटना को अंजाम देने के बाद कई जगहों पर सड़क अवरुद्ध कर दिया था.
हत्या से गुस्साए गाँव वालों ने पुलिस को शव नहीं सौंपा है और वे पीड़ित परिवार के लिए मुआवज़ा और हमलावरों की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे हैं.
हिंदू संगठनों ने इस घटना की निंदा की है. बजरंग दल के नेता सुभाष चौहान ने कहा है, "ये एक तरफ़ राज्य सरकार और दूसरी तरफ़ ईसाइयों और माओवादियों के बीच साँठगाँठ से हुआ है. माओवादियों को हिंदू हितों के लिए काम करने वालों को मारने की खुली छूट दी गई है."
कंधमाल में पिछले वर्ष हुई सांप्रदायिक हिंसा में लगभग 25 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकांश ईसाई समुदाय के थे.


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