कश्मीर में ग्रामीण की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

सीआरपीएफ़ ने इस मामले की कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं और एक असिस्टेंट कमांडेट सहित चार जवानों को निलंबित कर दिया है.
ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार रात पुलावामा ज़िले के खैगम गाँव में सीआरपीएफ़ की गोली से बढ़ई का काम करने वाले ग़ुलाम मोईनुद्दीन मौत हो गई थी.
खैगम और आसपास के गाँवों के लोगों में इससे काफ़ी गुस्सा है.प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने 'हमें आज़ादी चाहिए' और 'हत्यारों को गिरफ़्तार करो' के नारे लगाए.
प्रदर्शन में शामिल एक ग्रामीण ने कहा, " मोईनुद्दीन निर्दोष था और अपने बूढ़े पिता का अकेला सहारा था. उन लोगों ने उसे मार डाला. मुझे पता नहीं कि ऐसा क्यों हुआ."
सीआरपीएफ़ ने बुधवार को कहा था कि मोईनुद्दीन की मौत सीआरपीएफ़ के जवानों और चरमपंथियों के बीच हुए गोलीबारी में हुई.
जाँच का आदेश
लेकिन गुरुवार को सीआरपीएफ़ के प्रवक्ता प्रभात त्रिपाठी ने बीबीसी से कहा कि इस मामले कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी के आदेश दिए गए हैं.
हमने सीआरपीएफ़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है और जाँच जारी है रफ़ीक उल हसन, एसपी पुलवामा
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उन्होंने बताया कि इस मामले में एक असिस्टेंट कमांडेंट समते चार जवानों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं स्थानीय पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है.
पुलवामा के पुलिस अधीक्षक रफ़ीक उल हसन ने बताया, "हमने सीआरपीएफ़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है और जाँच जारी है."
मोईनुद्दीन की मौत का मामला राज्य के उत्तरी शहर सोपोर के गाँव बोमाई में क़रीब चार हफ़्ते पहले सेना की गोली से मारे गए दो नागरिकों की मौत के बाद सामने आया है.
राज्य सरकार ने इस मामले की मज़िस्ट्रेटी जाँच कराने के आदेश दिए थे. जाँच में सेना की ओर उँगली उठाई गई है.
बोमाई गाँव के लोगों ने कहा है कि अगर उनके गाँव से शनिवार तक सेना और सीआरपीएफ़ के कैंप हटाए नहीं गए तो वे गाँव छोड़कर चले जाएँगे.


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