जस्टिस चौधरी की बहाली से जरदारी और मुशर्रफ की नींद हराम हुई
जरदारी को नेशनल रिकंसिलिएशन आर्डनेंस (एनआरओ) की समीक्षा का भय सता रहा है जिसे वर्ष 2007 में मुशर्रफ ने लागू किया था। इसके तहत जरदारी व पूर्व प्रधानमंत्री मरहूम बेनजीर भुट्टो को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।
इसी कानून के तहत वनवास झेल रहे जरदारी और भुट्टो की वतन वापसी भी हुई थी।
उधर, मुशर्रफ को 3 नवम्बर, 2007 के को देश में घोषित किए गए आपातकाल के फैसले की समीक्षा का डर सता रहा है।
जाने माने राजनीतिक विशेषज्ञ आमिर मीर ने 'द न्यूज' में लिखा है कि उपरोक्त कारणों से जरदारी और मुशर्रफ की नींद हराम हो गई होगी।
उन्होंने जस्टिस चौधरी के करीबियों के हवाले से लिखा है, "पूरी संभावना है कि मुशर्रफ के फैसलों की समीक्षा की जाएगी।"
उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी 2008 को विश्व के नेताओं को लिखे एक खुले पत्र में चौधरी ने कहा था, "मैं संवैधानिक तौर पर पाकिस्तान का प्रधान न्यायाधीश हूं। मैंने पहले ही मुशर्रफ द्वारा 3 नवम्बर 2007 को लिए गए फैसलों को असंवैधानिक करार दिया है।"
उन्होंने कहा था, "निष्पक्ष न्यायपालिका के बगैर लोकतंत्र नहीं रह सकता है और पाकिस्तान में कोई भी न्यायाधीश निष्पक्ष नहीं रह सकता जब तक कि 3 नवम्बर 2007 के फैसले को पलटा नहीं जाता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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