• search

तो क्या गिलानी की छुट्टी करने की तैयारी में हैं जरदारी..

|

इस्लामाबाद, 19 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी वकीलों के हालिया आंदोलन से देश के बेकाबू होते हालात को नियंत्रित कर ताकतवर बनकर उभरे प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को अब बाहर का रास्ता दिखाने की फिराक में हैं।

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के वर्ष 2007 में बर्खास्त किए गए न्यायाधीशों की बहाली की मांग को लेकर चले आंदोलन का गुबार अभी थम भी नहीं पाया था कि जरदारी ने गिलानी को दरकिनार करने के लिए कभी अपने विरोधी रहे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कायद (पीएमएल-क्यू) के साथ गुपचुप वार्ता शुरू कर दी है।

वकीलों के आंदोलन के मद्देनजर सरकार ने सिर्फ न्यायाधीशों की ही बहाली का आदेश नहीं दिया था बल्कि शरीफ बंधुओं के खिलाफ सुनाए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की भी समीक्षा करने की बात कही थी।

इस फैसले के पलटे जाने और पंजाब में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ की सरकार बहाल होने की संभावनाओं के बीच जरदारी ने कभी पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की समर्थक रही पीएमएल-क्यू से वार्ता शुरू कर दी है।

जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) पंजाब में पीएमएल-नवाज की गठबंधन सरकार की सहयोगी थी।

जरदारी सोच रहे हैं कि यदि वे शाहबाज को पंजाब से बाहर कर दें तो वह आसानी से गिलानी को निशाना बना सकते हैं, जिन्होंने वकीलों की आंदोलन के दौरान नवाज शरीफ से संबंध सुधार लिए हैं।

यह बात सुनने में जितनी आसान लगे, व्यावहारिक में ऐसा मुश्किल होगा। क्योंकि आंकड़ा पीपीपी के विरूद्ध है और तो और पीएमएल-क्यू को अंदरूनी कलह से जूझना पड़ रहा है।

371 सदस्यों वाले इस सदन में पीएमएल-नवाज की 171, पीपीपी की 107 और पीएमएल-क्यू की 83 सीटे हैं तथा नौ सीटे छोटे दलों और निर्दलीयों के पास हैं।

शाहबाज सरकार की बर्खास्तगी से पहले उसके पास 278 विधायकों का समर्थन हासिल था। ऐसे देखा जाए तो पीपीपी-पीएमएल-क्यू के पास 190 का ही आंकड़ा होगा। जबकि पीएमएल-क्यू का 34 सदस्यों का समूह शाहबाज को समर्थन देने की धमकी दे रहा है। इसे रोकने के लिए जरदारी अध्यादेश लाने की तैयारी में हैं।

समाचार पत्र 'द न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार इस नई रणनीति के तहत राष्ट्रपति अध्यादेश के माध्यम से पीएमएल-क्यू की मदद करेंगे और एक बार पंजाब हाथ में आते ही पीपीपी और पीएमएल-क्यू इस्लामाबाद में गठबंधन सरकार बनाएंगे।

समाचार पत्र के अनुसार इस रणनीति का प्रारूप जरदारी और पीएमएल-क्यू के नेता शुजात हुसैन, परवेज इलाही और मुनीस इलाही की बैठक में तय किया गया। हालांकि राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने ऐसी किसी बैठक से इंकार किया है।

अखबार के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि जरदारी के गुस्से का पहला शिकार गिलानी ही बनने वाले हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

*

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more