मौजूदा तीसरा मोर्चा वैचारिक प्रतिबद्घता की उपज नहीं है: गुजराल

नई दिल्ली, 18 मार्च(आईएएनएस)। 1997 में बहुदलीय गठबंधन सरकार की अगुवाई कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल का कहना है कि मौजूदा तीसरा मोर्चा कुछ नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की उपज है, इसका वैचारिक प्रतिबद्घता से कुछ लेना देना नहीं है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यह गठबंधन चुनाव से पहले ही बिखर सकता है।

गुजराल ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "तीसरा मोर्चा कुछ नेताओं की सियासी महत्वाकांक्षा के प्रति प्रतिबद्घ है, उसका कोई वैचारिक वजूद नहीं है। इसकी भी आशंका है कि यह गठबंधन चुनाव से पहले ही बिखर सकता है। अगर चुनाव तक इसका वजूद बचा रहा तो भी इसके नेताओं के बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा का टकराव होता रहेगा। इनके बीच व्यक्तित्व का टकराव गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगा। प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए इनके बीच टकराव होना तय है।"

उन्होंने कहा कि इस गठबंधन में ऐसे ही दल शामिल हैं जो यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि कांग्रेस और भाजपा जैसी दो प्रमुख पार्टियों में से किसके साथ गठजोड़ किया जाए। गुजराल ने कहा, "चुनाव के बाद की बात कौन कहे, मुझे तो इस गठबंधन के चुनाव से पहले ही बिखरने की आशंका हो रही है।"

प्रधानमंत्री बनने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खुद उन्होंने इस पद के लिए लाबिंग नहीं की थी। वह कहते हैं, "इस पद के लिए उनका चयन खुद उनके लिए आश्चर्यजनक था। उस वक्त गुजराल घर पर थे जब देवेगौड़ा के उत्तराधिकारी के चयन के लिए आंध्र प्रदेश भवन में बैठक चल रही थी। वह कहते हैं, "मैं घर पर इसलिए था कि मुझे कोई भूमिका अदा नहीं करनी थी। चंद्रबाबू नायडू ने मुझे फोन कर बैठक में बुलाया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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