मेघालय में राष्ट्रपति शासन का फैसला (लीड-2)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, "मंत्रिमंडल को मेघालय विधानसभा में मंगलवार को हुए विश्वास मत के संबंध में राज्यपाल की रिपोर्ट मिली। उन्होंने रिपोर्ट में संवैधानिक कार्यप्रणाली में संकट उत्पन्न होने की बात कहते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की। रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है और सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजी गई है। "
उधर मेघालय में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के बुधवार के फैसले का राज्य में सत्तारूढ़ मेघालय प्रोग्रेसिव एलायंस(एमपीए) ने विरोध किया है।
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा) के नेता पी. ए. संगमा ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की चेतावनी दी है।
संगमा ने आईएएनएस से कहा, "राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला अभूतपूर्व और असंवैधानिक है। एमपीए सरकार द्वारा विश्वास मत जीतने के बाद कोई संवैधानिक संकट नहीं था। ऐसे में यह निर्णय बहुत दुखद है।"
उन्होंने कहा, "गुरुवार को हम इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।"
मेघालय के मुख्यमंत्री दोनकूपर रॉय ने कहा, "यह और कुछ नहीं बल्कि कांग्रेस द्वारा लोकतांत्रिक सरकार की हत्या है।" उधर कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत किया है।
नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के फैसले का विरोध किया है।
उल्लेखनीय है कि मेघायल में पांच विधायकों द्वारा सत्तारूढ़ गठबंधन से नाता तोड़ लेने से राज्य सरकार अल्पमत में आ गयी थी। इन विधायकों में पूर्व मंत्री एडवाइजर पेरियोंग और पॉल लिंग्दोह, उपाध्यक्ष सनबार शुलइ, और दो निर्दलीय विधायक इस्माइल मराक और लिमिसन संगमा शामिल थे।
विश्वासमत से पहले विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इन पांचों के खिलाफ 'अंतरिम निलंबन' का आदेश जारी कर देने से उन्हें मतदान से वंचित रहना पड़ा था।
मंगलवार के शक्तिपरीक्षण में राज्य सरकार विधानसभा अध्यक्ष के इकलौते मत की वजह से बची थी।
राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की वजह से 1998 से 2003 के बीच विभिन्न दलों के सहयोग से चार मुख्यमंत्रियों ने सरकार का गठन किया था।
वर्ष 1972 में अस्तित्व में मेघालय में अब तक केवल दो सरकारें ही ऐसी बनी हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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