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ँभारत की मदद के बगैर आतंकवाद का सफाया संभव नहीं : श्रीलंका (राउंडअप)

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स्वास्थ्य व पोषण मंत्री निमाल श्रीपाला डी सिल्वा ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं को बताया, "भारत की मदद के बगैर हम अपने देश से आतंकवाद का सफाया नहीं कर सकते।"

डी सिल्वा, कुछ राजनीतिक पार्टियों द्वारा 52 सदस्यीय भारतीय चिकित्सकीय दल की उपस्थिति पर उठाई गई आपत्ति के संदर्भ में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।

डी सिल्वा ने कहा कि भारत से आए सभी डॉक्टरों का और उनकी योग्यता का परीक्षण किया गया उसके बाद उन्हें यहां काम करने की अनुमति प्रदान की गई है।

इसके पहले श्रीलंका की मार्क्‍सवादी पार्टी ने देश में भारत की एक सुसज्जित चिकित्सकीय इकाई की उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की थी।

भारत विरोधी के रूप में जाने जाने वाले जनथा विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) की ओर से मंगलवार को संसद में कहा गया था कि भारतीय सेना की चिकित्सकीय इकाई के 52 सदस्यों के चिकित्सकीय दल की उपस्थिति श्रीलंका की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

जेवीपी के संसदीय दल के नेता अनुराकुमारा दिशानायके ने कहा था कि भारतीय चिकित्सकीय दल के पहुंचने का अंतर्राष्ट्रीय रूप से यह गलत संदेश जा रहा है कि श्रीलंका अपने लोगों की देख-भाल कर पाने में अक्षम है।

ज्ञात हो कि भारतीय चिकित्सकों, शल्य चिकित्सकों, अर्ध चिकित्सकीय कर्मचारियों, तकनीकी कर्मचारियों का एक दल चिकित्सकीय उपकरणों सहित पिछले सप्ताह पूर्वी पत्तन शहर त्रिंकोमाली पहुंचा था। दल ने इसी सप्ताह से युद्ध के दौरान घायल हुए नागरिकों का इलाज करना शुरू कर दिया है।

उधर श्रीलंकाई सेना ने अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए तमिल लड़ाकों के अंतिम गढ़ के पहले स्थित एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जंक्शन पर मंगलवार को कब्जा कर लिया।

रक्षा मंत्रालय की ओर से मंगलवार को कहा गया कि पूरे देश को लिट्टे से मुक्त कराने के लिए जारी लड़ाई के अंतिम चरण में पहुंची सेना ने उत्तर-पूर्वी मुल्लैइतिवु जिले के पुथुक्कु डियिरुप्पु इलाके में स्थित एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जंक्शन इरुनापालाइ जंक्शन पर कब्जा कर लिया।

मंत्रालय ने कहा है, "इस जंक्शन पर कब्जा कर लिए जाने के बाद लिट्टे का आपूर्ति मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।"

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस जंक्शन पर कब्जा कर लिए जाने के बाद जहां एक ओर लिट्टे के प्रभाव वाला इलाका और सिकुड़ गया है, वहीं इलाके में फंसे बेगुनाह नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रास्ता मिल गया है।

इसके पहले इस इलाके में सेना और लिट्टे के बीच संघर्ष में कम से कम 29 तमिल विद्रोही मारे गए। संघर्ष में बड़ी संख्या में तमिल विद्रोही घायल भी हुए हैं।

सेना और लिट्टे के बीच संघर्ष सोमवार सुबह से ही जारी था। सेना के अनुसार 14 विद्रोहियों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं।

इस बीच यूरोपीय संघ (ईयू) के यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के आयुक्त बेनिटा फेरेरो वाल्डनर का कहना है कि श्रीलंका में स्थिति बेहद 'चिंताजनक और खतरनाक' बनी हुई है।

वाल्डनर ने कहा कि श्रीलंका के युद्धग्रस्त उत्तरी इलाके में लगभग 170,000 लोग फंसे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) दोनों ने ही ईयू की संघर्ष विराम की अपील स्वीकार नहीं की।

उधर तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में श्रीलंका सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में आत्मदाह का प्रयास करने वाले दो राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। यह जानकारी मंगलवार को पुलिस ने दी।

पुलिस के अनुसार वीसीके के एन. आनंद(23) और पीएमके के राजशेखर (24) ने क्रमश: कुड्डालोर और अरियालुर में आत्मदाह का प्रयास किया था।

इस मसले को लेकर दिसंबर से अब तक 11 लोग आत्मदाह कर चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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