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'वकीलों के आंदोलन की बड़ी जीत'

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'वकीलों के आंदोलन की बड़ी जीत'

पाकिस्तान के एक अवकाशप्राप्त जज और वकीलों के नेता तारिक़ महमूद का कहना है कि वकीलों के आंदोलन की जीत हुई है और इससे पाकिस्तान में स्थिरता आएगी.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने सरकार के फ़ैसले की सरहना की और कहा, " पिछले एक साल से जजों की बहाली के मामले को टाला जा रहा था, सरकार को ये काम पहले करना चाहिए था. लेकिन देर आयद दुरुस्त आयद."

उनका कहना था कि सरकार के सामने कई माँगें थीं और वो सभी माँगें मानने को तैयार भी थी. लेकिन बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को बहाल नहीं करना चाहती थी, इसलिए उनकी बहाली एक बड़ी जीत है.

सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी सहित बर्ख़ास्त सभी जजों को बहाल करने की घोषणा की थी.

'स्थिति पर नज़र'

हालांकि जब तारिक़ महमूद से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान में अदालतों को नवंबर, 2007 से पहले वाली स्थिति में लाया जाएगा, इस पर उनका कहना था कि उसपर आगे बातचीत होगी.

ग़ौरतलब है कि नवंबर 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में आपातकाल की घोषणा करके मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी सहित 60 जजों को बर्ख़ास्त कर दिया था.

उस समय राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में सेना प्रमुख रहते राष्ट्रपति चुनाव लड़ने को चुनौती देने वाली याचिक पर सुनावई चल रही थी.

हालांकि अदालत ने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इजाज़त दे दी थी लेकिन चुनाव आयोग को अंतिम फ़ैसला देने पर रोक लगा दी थी.

इसी खींचतान के बीच राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल की घोषणा करके इफ़्तिख़ार चौधरी सहित 60 जजों को उनके पद से हटा दिया था और नए जज नियुक्त कर दिए थे.

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