गुरु की भूमिका में नजर आए मुन्नाभाई (लीड-1)

रविवार शाम संजय दत्त ने लखनऊ के नेशनल इंटर कालेज में शिक्षकों और छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान दत्त छात्रों के सामने गुरु की भूमिका में नजर आए और उन्होंने छात्रों से समाज की गुरुओं की भूमिका के महत्व को बताया। दत्त ने कहा कि देश के निर्माण में गुरुओं का बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे हमें हर मोड़ पर रास्ता दिखाते हैं।

पुराने दिनों को याद करते हुए दत्त ने कहा कि एक बार उनके एक शिक्षक ने पिटाई की थी और उस समय वह अपने शिक्षक से बहुत नाराज थे लेकिन बाद में अहसास हुआ कि शिक्षक की वह सजा उनकी ही भलाई के लिए थी। उन्होंने कहा कि शिक्षक और गुरु हमारे लिए माता पिता के समान होते हैं।

इस मौके पर छात्रों से दत्त ने कहा कि वे उनके मुन्नाभाई के किरदार से सीख न लेते हुए बिना नकल किए पढ़ाई करके परीक्षा पास करें। इससे पहले सोमवार दोपहर संजय दत्त लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरुओं (मौलानाओं) से मिलने पहुंचे। दत्त ने मौलानाओं से जीत के आशीर्वाद लेते समय कहा कि वो उनके लिए यह दुआ करें कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव लड़ने की अनुमित प्रदान कर दे।

संजय दत्त सबसे पहले पुराने लखनऊ के नक्खास इलाके में मौलाना अलीम फारुकी के घर गए और आगामी लोकसभा चुनाव जीतने का उनसे आशीर्वाद लिया। उसके बाद सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रसीद फिरंग महली के ऐशबाग स्थित आवास और शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद से चौक स्थित उनके आवास जाकर उनसे मुलाकात की। मौलानाओं के साथ दत्त की ये मुलाकातें बंद कमरे में हुईं।

मुलाकात के बाद दत्त ने कहा कि मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा एक हैं। यही उन्हें बचपन से सिखाया गया है। उनके साथ मान्यता के न होने के सवाल पर दत्त ने चुटकी लेते हुए कहा कि बेगम की जगह घर में होती है।

इस दौरान संजय दत्त की एक झ्झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग अपने-अपने मकानों की छतों पर चढ़कर मुन्नाभाई की ओर टकटकी लगाए हुए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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