'प्रधानमंत्री के नाम का एलान चुनाव बाद'

साथ ही उनका कहना था कि पंद्रहवीं लोकसभा की स्थिति वर्ष 1996 में हुए लोकसभा चुनावों जैसी होने जा रही है और तीसरा मोर्चा सरकार बनाएगा.
तीसरे मोर्चे में प्रधानमंत्री पद के नाम पर मीडिया की तरफ़ से पूछे गए सवाल पर चंद्रबाबू नायडू का कहना था, "प्रधानमंत्री पद की घोषणा लोकसभा चुनावों के ख़त्म होने पर आपसी सहमति के बाद तय किया जाएगा."
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों कर्नाटक में औपचारिक रूप से तीसरे मोर्चे के गठन की घोषणा की गई थी. इस मोर्चे में विभिन्न राज्यों में प्रभाव रखने वाली आठ पार्टियाँ शामिल हैं.
डिनर राजनीति
हमलोग एक विकल्प बनाने की कोशिश कर रहे हैं, 1996 दोहराया जाएगा, जब सभी दलों ने स्वतंत्र रुप से चुनाव लड़ा था और चुनाव बाद सुशासन के लिए एक साथ हाथ मिलाया था चंद्रबाबू नायडू
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उधर बहुजन समाज पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने तीसरे मोर्चे के नेताओं को दिल्ली में रविवार की शाम डिनर पर बुलाया है.
टीकाकारों के अनुसार इस दावत में तीसरे मोर्चे की भावी रणनीति और मोर्चे की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर चर्चा संभव है. ऐसे में नायडू की टिप्पणी अहम मानी जा रही है.
डिनर में हिस्सा लेने के लिए हैदराबाद से दिल्ली रवानगी से पहले नायडू ने कहा कि कई राजनीतिक दल चुनाव से पहले साथ आए हैं और चुनाव बाद ये पार्टीयाँ गठबंधन बनाएगी.
उनका कहना था, "बहुत सारी पार्टियाँ हैं और हम लोगों को उनके साथ काम करना है. हम लोगों को एक सहमति बननानी होगी. उसके बाद ही किसी एक के नाम का एलान किया जाएगा है."
जब उनसे पूछा गया कि क्या मायावाती ने तीसरे मोर्टे के सामने प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर अपना नाम पेश करने की बात कही है तो उनका कहना था कि मायावती की तरफ़ से ऐसी कोई मांग नहीं रखी गई है.
तीसरे मोर्चे के सरकार बनाने पर नायडू ने कहा कि वर्ष 1996 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में जितनी भी गंठबंधनें बनी हैं वो सभी चुनावों के बाद बनी हैं.
नायडू के अनुसार मौजूदा सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और इससे पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन भी चुनावों के बाद ही बनी थी.
तीसरे मोर्चे के चुनावों लड़ने के सवाल पर उनका कहना था कि मोर्चे में शामिल पार्टियाँ अपने अपने प्रभाव वाले राज्यों में स्वतंत्र रुप से चुनाव लड़ेंगी.
नायडू का कहना था," हमलोग एक विकल्प बनाने की कोशिश कर रहे हैं, 1996 दोहराया जाएगा, जब सभी दलों ने स्वतंत्र रुप से चुनाव लड़ा था और चुनाव बाद सुशासन के लिए एक साथ हाथ मिलाया था."


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