मायावती की ओर से सफ़ाई पेश

बसपा की ओर से मायावती को प्रधानमंत्री घोषित करने संबंधी ख़बरों पर सफ़ाई पेश की गई है. बसपा ने कहा है कि मोर्चे को कोई अल्टीमेटम नहीं दिया गया है. बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि बसपा ने तीसरे मोर्चे को कोई अल्टीमेटम दिया है.
सतीश मिश्रा ने एक बयान जारी कर कहा है,'' बसपा ने तीसरे मोर्चे को ऐसा कोई अल्टीमेटम नहीं दिया है कि इसके नेता 48 घंटों में सुश्री मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करें.'' उनका कहना है कि ये ख़बरें निराधार हैं.
उन्होंने आरोप लगाया है कि तीसरे मोर्चे की बढ़ती ताक़त और एकता को देखकर कांग्रेस और भाजपा ने मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार किया जा रहा है.
बसपा ने तीसरे मोर्चे को ऐसा कोई अल्टीमेटम नहीं दिया है कि इसके नेता 48 घंटों में सुश्री मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करें सतीश चंद्र मिश्रा, बसपा महासचिव
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बसपा महासचिव का कहना है कि मायावतीजी कांशीराम के जन्मदिन के अवसर पर अपने नए आवास में प्रवेश कर रही हैं, इस अवसर पर कांग्रेस और भाजपा को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से जो नेता एकजुट हुए हैं, उन्हें रविवार को अनौपचारिक रात्रिभोज में आमंत्रित किया गया है.
उनका कहना था कि इस रात्रिभोज को किसी राजनीतिक उद्देश्य से जोड़ना उचित नहीं है.
उल्लेखनीय है कि रविवार को वाममोर्चे के सभी घटकों यानि सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक की बैठक होने वाली है और इसके बाद वाममोर्चे के नेता तीसरे मोर्चे के दूसरे नेताओं से मिलेंगे.
इसमें टीडीपी, टीआरएस, एआईडीएमके, जेडीएस और बीजेडी के नेताओं के होने की संभावना है. फिर शाम को बीएसपी की नेता और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने तीसरे मोर्चे के नेताओं को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया है.
तीसरे मोर्चे पर सवाल
इस बीच कांग्रेस और भाजपा ने एक बार फिर तीसरे मोर्चे के अस्तित्व और भविष्य पर सवालिया निशान लगाया है. ये कौन तय करेगा कि कौन पहला मोर्चा है कौन दूसरा है और कौन तीसरा है प्रणब मुखर्जी
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तीन दिन पहले ही तीसरे मोर्चे का गठन हुआ और उसी समय से कांग्रेस और भाजपा ने उस पर नकारात्मक टिप्पणियां शुरू कर दीं.
मोर्चे के गठन पर शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बेहद चुटीले अंदाज़ में टिप्पणी की और कहा, "ये कौन तय करेगा कि कौन पहला मोर्चा है कौन दूसरा है और कौन तीसरा है."
मुखर्जी का कहना था कि अगर इस मोर्चे के नेताओं का मक़सद गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेस सरकार बनाना है तो कोई दिक़्क़त नहीं है लेकिन इतिहास देखा जाए तो इस तरह का मोर्चा कभी सफल नहीं हो सका.
लेकिन मुखर्जी के इस बयान पर वामदलों का कहना था कि तीसरे मोर्चे की असफलता के लिए कांग्रेस ही ज़िम्मेदार रही है.उधर बंगलैर में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने भी तीसरे मोर्चे पर जमकर प्रहार किया.
उनका कहना था, "तीसरा मोर्चा एक छलावा है. इसकी न तो कोई विश्वसनीयता, न तो कोई स्वीकृति है और न ही इसके पास कोई नेता है."
विश्लेषकों का कहना है तीसरे मोर्चे के बारे में जिस तरह से कांग्रेस और भाजपा के नेता बयान दे रहे हैं उससे साफ़ है कि ये दोनों ही पार्टियाँ इस मोर्चे की राजनीतिक हैसियत को बेहद गंभीरता से महसूस कर रही हैं.


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