लाहौर में शरीफ के पीछे जन सैलाब उमड़ पड़ा

एक स्थानीय पत्रकार यूनुस बाथ ने कहा, "यह एक जन सैलाब है। कुछ ऐसा लगता है, जैसे पूरा लाहौर शहर यहां उमड़ पड़ा है। जवान, बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे सभी यहां जुटे हुए हैं।"

भीड़, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की सरकार के खिलाफ नारे लगा रही थी। भीड़ में क्रांति और बदलाव के स्वर भी गूंज रहे थे।

शरीफ ने वकीलों के उस अभियान को अपना खुला समर्थन दिया है, जिसमें दो साल पहले पद से हटाए गए सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी सहित अन्य न्यायाधीशों की फिर से बहाली की मांग की गई है।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के एक प्रवक्ता अहसान इकबाल ने कहा कि शरीफ के आवास को सैकड़ों पुलिस कर्मियों ने घेर लिया था। उनके आवास पर पहुंचने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे।

लेकिन गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी रहमान मलिक ने बीबीसी को बताया कि शरीफ को नजरबंद नहीं किया गया था। उन्हें बाहर निकलने की पूरी आजादी थी।

उधर लांग मार्च समर्थकों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में कुछ पुलिस कर्मियों समेत कई के घायल होने की खबर है। पथराव कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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