संयुक्त राष्ट्र का आरोप निराधार: श्रीलंका

श्रीलंका के मानवाधिकार मंत्री महिंदा समरसिंघे ने यहां संवाददाताओं को बताया, "इस बयान से हम बेहद निराश और हताश हुए हैं। यह बयान कथित तौर पर विश्वसनीय सूत्रों पर आधारित है और इसमें संघर्षरत क्षेत्रों में नागरिकों के हताहत होने के बारे में बेबुनियाद आंकड़े दिए गए हैं।"
मंत्री ने इन आरोपों को गलत बताया कि सरकारी सुरक्षा बल नागरिकों के लिए चिह्न्ति किए गए सुरक्षित क्षेत्रों में भारी गोलाबारी कर रहे हैं। उन्होंने शिकायत की कि मानवाधिकारों से संबद्ध संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त नवी पिल्लै का यह एकपक्षीय बयान बिना किसी से परामर्श किए और श्रीलंका सरकार का पक्ष लिए बगैर जारी किया गया है।
समरसिंघे ने कहा, "हमारे सुरक्षा बलों ने कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाया और वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।" पिल्लै ने जेनेवा में कड़ा बयान जारी करते हुए कहा था कि सरकार द्वारा नागरिकों के सुरक्षित क्षेत्र चिह्न्ति किए जाने के बावजूद वहां लगातार गोलाबारी हो रही है।
पिल्लै ने बयान में कहा था, "विश्वसनीय सूत्रों से संकेत मिला है कि 20 जनवरी के बाद से 2800 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं और 7000 से ज्यादा घायल हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग सुरक्षित क्षेत्रों में मारे गए हैं। इनमें बच्चों की तादाद भी सैकड़ों में है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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