यूएन को श्रीलंका में युद्धापराध की आशंका

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि श्रीलंका में चल रहे युद्ध के दौरान सेना और तमिल विद्रोहियों की कार्रवाइयाँ युद्धापराध की श्रेणी में आ सकती हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों की उच्चायुक्त नवी पिल्ले ने श्रीलंका के उत्तर-पूर्व में लड़ रहे दोनों पक्षों से कहा है कि वे तुरंत कार्रवाइयों को रोकें. श्रीलंका ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट पर नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इसकी जाँच की जानी चाहिए.
श्रीलंका के मानवाधिकार मामलों के मंत्री ने कहा है कि सरकार इस रिपोर्ट से आश्चर्यचकित भी है और निराश भी. तमिल विद्रोहियों की ओर से इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है.
बीबीसी के श्रीलंका संवाददाता अनबरासन इथिराजन का कहना है कि श्रीलंका के युद्ध पर संयुक्त राष्ट्र की अब तक का सबसे कड़ा संदेश है.
हज़ारों हताहत
पिछले कुछ महीनों में भारी युद्ध के बीच सेना ने तमिल विद्रोहियों को खदेड़ते हुए एक कोने में समेट दिया है. सेना का कहना है कि वह अब तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अंतिम युद्ध लड़ रही है.
श्रीलंकाई सेना और एलटीटीई ने जो कार्रवाइयाँ की हैं उनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और मानवीय क़ानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती हैं नवी पिल्ले, उच्चायुक्त, मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र
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नवी पिल्ले ने कहा है, "श्रीलंकाई सेना और एलटीटीई ने जो कार्रवाइयाँ की हैं उनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और मानवीय क़ानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती हैं."
उन्होंने कहा कि सरकारी फ़ौजें लगतार उन इलाक़ों में बमबारी कर रही हैं जो नागरिकों के लिए सुरक्षित घोषित किए गए हैं.
उनका कहना था कि दूसरी ओर तमिल विद्रोहियों ने नागरिकों को मानव ढाल की तरह उपयोग कर रहे हैं और जो भागने का प्रयास करता है उस पर वे गोलीबारी करते हैं.
उनका कहना था, "नागरिकों के साथ एलटीटीई का व्यवहार क्रूर और अमानवीय है और इस बात की जाँच की जा सकती है कि क्या यह युद्धापराध की श्रेणी में आता है."
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले दो महीनों में कम से कम 2800 नागरिक मारे गए हैं और सात हज़ार अन्य लोग घायल हुए हैं. नवी पिल्ले का कहना है कि इस संघर्ष में सैकड़ों बच्चों की मौत हुई है और हज़ारों घायल हुए हैं.


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