भाजपा-जनतादल यू में सीटों का तालमेल

दिल्ली में हुई बैठक के बाद भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने इसकी घोषणा की है.
इस तालमेल के तहत जनतादल (यू) बिहार की 40 सीटों में से 25 पर चुनाव लड़ेगी जबकि भाजपा 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
पिछले चुनाव में जनता दल (यू) ने 24 और भाजपा ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
इस बार समझौते के तहत जनता दल (यू) को सिर्फ़ एक ही सीट अधिक मिली है लेकिन बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि इससे यह राजनीतिक संकेत तो गया ही है कि बिहार में जनता दल (यू) भाजपा के मुक़ाबले ज़्यादा ताक़तवर नज़र आ रही है.
वैसे जनता दल (यू) पिछली बार से दो सीटें अधिक मांग रही थी.
सीटों के तालमेल के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यू) के नेता नीतीश कुमार ने कहा है, "ये महत्वपूर्ण नहीं है कि कौन कितनी सीटों पर लड़ता है, हमारा मक़सद है कि ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीती जा सकें."
जो सीट इस बार जनता दल (यू) को अतिरिक्त मिली है वह किशनगंज है जहाँ से उसका उम्मीदवार पिछली बार दूसरे नंबर पर आया था.
राज्य की राजनीति
पिछली बार लोकसभा चुनाव में भाजपा-जनता दल (यू) गठबंधन का चुनावी प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था और इस गठबंधन ने सिर्फ़ 11 सीटें हासिल की थीं.
लालू प्रसाद यादव गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में ही रहना चाहते हैं
इनमें से छह सीटें जनता दल (यू) की थीं और पाँच भाजपा की.
पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शनों के आधार पर एक दशक पुराने एनडीए गठबंधन को उम्मीद है कि इस बार लोकसभा में उनके प्रदर्शन में सुधार आ सकता है.
इस गठबंधन के ख़िलाफ़ यूपीए गठबंधन होगा जिसमें लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति शामिल हैं.
हालांकि अभी यूपीए गठबंधन में शामिल इन तीनों दलों में सीटों के बँटवारे पर कोई सहमति नहीं बनी है लेकिन तीनों ही दल कोशिश कर रहे हैं कि कोई रास्ता निकल आए.
लोकजनशक्ति पार्टी राज्य में 16 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और कांग्रेस 10 सीटों पर दावेदारी कर रही है लेकिन राष्ट्रीय जनता दल को ये मंज़ूर नहीं है.
अगर ये तीनों दल साथ नहीं आ पाते हैं तो इस लड़ाई का फ़ायदा एनडीए गठबंधन को मिल सकता है.


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