घटती मुद्रास्फीति का कीमतों से कोई लेनादेना नहीं
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। मुद्रास्फीति की दरों के पिछले छह वर्षो के निचले स्तर पर पहुंच जाने के बाद अधिकांश गृहणियों को लग रहा था कि इससे उनका घरेलू बजट कम हो जाएगा लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ।
उत्तरी दिल्ली की एक गृहणी ने आईएएनएस को बताया, "एक वर्ष पहले मैं किराने पर प्रति सप्ताह 800 रुपये खर्च करती थी लेकिन अब मुझे इस पर 1,000 रुपये खर्च करने होते हैं। मुझे नहीं लगता कि मुद्रास्फीति की दरें कम होने का महंगाई पर कोई असर हुआ है।"
उल्लेखनीय है कि गत 23 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश में मुद्रास्फीति की दर घटकर 2.43 फीसदी हो गई जो पिछले छह वर्षो का न्यूनतम स्तर है।
उधर विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रास्फीति की दर में कमी का तात्पर्य है बढ़ती कीमतों का थमना न कि कीमतों का घटना।
अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि थोक मूल्य सूचकांक कीमतों के बारे में वास्तविक जानकारी प्रस्तुत नहीं करते। वास्तविक स्थिति का अंदाजा खुदरा कीमतों के आधार पर ही लगाया जा सकता है जो कि विभिन्न उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों पर आधारित होती हैं।
दिल्ली स्थित वित्तीय सेवा कंपनी कास्सा के अर्थशास्त्री सिद्धार्थ शंकर ने कहा, "उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट न आना ही हमारे लिए चिंता की बात है। दरअसल यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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