लिज्जत : पापड़ के जरिए महिलाओं का सशक्तिकरण
जसवंतीबेन पोपट ने आईएएनएस को बताया, "पुरुष लोग काम पर चले जाते थे और बच्चे स्कूल। घर का कामकाज निपटाने के बाद हम पूरे दिन खाली रहते थे। संपन्न घरों की महिलाओं की तरह हमारे पास समय काटने के लिए शॉपिंग या किटी पार्टी जैसा कोई साधन नहीं था। इसलिए हमने पापड़ बनाने की योजना तैयार की।"
जिन सात महिलाओं के दल ने लिज्जत की शुरुआत की थी, उसमें से पोपट ही एक मात्र जीवित बची हुई हैं। लिज्जत की स्थापना 15 मार्च 1959 को की गई थी।
जसवंतीबेन कहती हैं, "हमने निजी स्तर पर कुछ संसाधन जुटाए और ढाई किलोग्राम पापड़ से शुरुआत की। उसे एक स्थानीय दुकानदार को नकद दाम पर बेचा गया। पहले दिन 10 रुपये का कारोबार हुआ।"
ऐसे समय में जब लिज्जत अपनी स्थापना और सफलता की स्वर्ण जयंती मना रहा है, जसवंतीबेन अभी भी चीरा बाजार में स्थित लोहाना निवास में काम में लगी हुई हैं। लिज्जत की शुरुआत इसी इमारत में हुई थी।
श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ (एसएमजीयूएलपी) कोआपरेटिव की अध्यक्ष ज्योति नाइक ने कहा, "80 रुपये के ऋण के साथ सात महिलाओं द्वारा शुरू किया गया यह कारोबार आज 72 केंद्रों से संचालित किया जा रहा है। इन केंद्रो पर 42,000 महिलाएं काम कर रही हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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