रंगपंचमी की 'गेर' भी पहचान है इन्दौर की

इन्दौर, 14 मार्च(आईएएनएस)। मध्यप्रदेश का इंदौर शहर होल्कर शासनकाल की अपनी परंपराओं को आज भी अपने दामन में संजोए हुए है। रंगपंचमी पर शहर में निकलने वाली गेरें (रंगारंग जुलूस) भी उन्हीं परंपराओं में से एक है। यह ऐसा अवसर होता है जब पूरा इन्दौर शहर ही रंग में रंग जाता है और मस्ती हिलोरे मारती है। वर्तमान में इन्दौर भले ही पानी के संकट से जूझ रहा हो मगर शहर के उत्सवधर्मी लोग 15 मार्च को रंगपंचमी पर गेर निकालने की तैयारी में जुटे है और उनकी कोशिश है कि वे इस मौके पर हर किसी को अपने रंग में रंग लें।

रियासत काल में होल्कर राजवंश के प्रतिनिधि हाथी-घोड़ों पर सवार होकर प्रजा के साथ सड़कों पर होली मनाने निकलते थे। हालांकि इस परंपरा पर होल्कर राज के ही आखिरी वर्षो में विराम लग गया था। लेकिन बहुत जल्दी ही इस परंपरा को इंदौर के उत्सवधर्मी लोगों ने फिर जीवन्त कर दिया। पहले इस सिलसिले को शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं छोटेलाल और बाबूलाल गिरी ने शुरू किया। बाद में अभ्यास मंडल के राकेश शर्मा और उनके साथियों ने इस सिलसिले में पहलकदमी की। धीरे-धीरे इस सिलसिले को विस्तार मिलता गया, जो अभी तक जारी है। यह ऐसा उत्सव है जिसमें पूरा शहर इसमें शामिल होता है और जमीन से लेकर आसमान तक सिर्फ रंग ही रंग नजर आते हैं।

शहर के अलग अलग हिस्सों से गेर (टोली) निकलती है, इनमें हाथी, घोड़े, ऊंट के अलावा लोग बैंड बाजों की धुनों पर थिरकते नाचते चलते है। इन गेरों में तरह-तरह की झांकिया भी होती है और साथ ही लोग रथों को खींचकर चलते है। रंगों से भरे पानी के टेंकर होते है, जिनमें इतनी शक्तिशाली मोटरें लगी होती है कि उनके द्वारा फेंका जाने वाला रंग मकानों की चौथी और पांचवी मंजिल पर खड़े लोगों को भी तरबतर कर देता है।

इन निकलने वाली गेरों में रंगों के साथ अबीर गुलाल का भी खूब इस्तेमाल होता है। गुलाल भी विभिन्न यंत्रों के सहारे आसमान में उड़ाई जाती है और लोग गुलाल के रंग में रंग जाते है। शहर के अलग अलग हिस्सों से निकलने वाली गेरें पूरे शहर को अपने रंग में रंग लेती है। लगभग आधा दर्जन गेरें शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए राजबाड़ा पर पहुंचती है और वहां के नजारे को पूरा रंगीन बना देती है। पूरे रास्ते इन गेरों के स्वागत में भांग और ठंडाई का नि:शुल्क वितरण होता है। इन गेरों में आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है फाग यात्रा, जिसमें महिलाएं, बच्चे और पुरूष एक साथ नाचते नजर आते है। यह फाग यात्रा पूरी तरह पारिवारिक रंग में रंगी होती है।

15 मार्च को रंगपंचमी के दिन निकलने वाली गेर की तैयारियां जोरों पर चल रही है। नगर निगम ने इस आयोजन के लिए अतिरिक्त पानी देने से इन्कार कर दिया है मगर इसका लोगों के उत्साह पर कोई असर नहीं है। इन्दौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल कहते है कि रंग पंचमी का दिन इन्दौर के लिए विशेष है क्योंकि इस दिन पूरा शहर ही रंग और मस्ती में डूब जाता है। शहर में व्याप्त पानी के संकट को लेकर वे कहते है कि इसका रंगपंचमी के कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+