2004 के चुनाव में 219 विजेता उम्मीदवारों ने 50 प्रतिशत या उससे अधिक मत प्राप्त किए
2004 के आम चुनावों में लोकसभा के 543 में से 219 सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदान के 50 प्रतिशत या उससे अधिक मत प्राप्त किए थे। इसका अर्थ हुआ कि शेष 324 सीटों पर (कुल 543 सीटों का लगभग 60 प्रतिशत) विजयी उम्मीदवार कुल मतदान के 50 प्रतिशत वोट प्राप्त नहीं कर सके थे।
देश के विभिन्न राज्यों में मतदान के रुझान काफी अलग-अलग रहे हैं। उदाहरण के तौर पर जहां तमिलनाडु में अधिकांश (39 में से 34) सीटों पर विजेता प्रत्याशियों ने कुल मतदान के 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किए, वहीं उत्तर प्रदेश में 80 सीटों में से केवल 9 सीटों पर विजयी प्रत्याशियों ने इतने अंतर से वोट प्राप्त किए। प्रतिशत की दृष्टि से तमिलनाडु में 87 प्रतिशत से अधिक स्थान 50 प्रतिशत या उससे अधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों को मिले जबकि उत्तर प्रदेश में केवल 11़.25 प्रतिशत विजेता उम्मीदवार ही इस प्रतिशत तक पहुंच पाए।
तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के अलावा, लोकसभा की अधिक सीटों वाले कुछ अन्य राज्यों में अलग-अलग रुझान देखे गए। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 सीटों में से 29 सीटों पर विजेता प्रत्याशियों ने 50 प्रतिशत या अधिक मत प्राप्त किए, जबकि बिहार में 40 विजेता प्रत्याशियों में से मात्र 11 प्रत्याशी ही इस अंतर से जीत सके।
दक्षिण के दो अन्य राज्य यथा कर्नाटक और केरल को भी इस ²ष्टि से कोई विशेष सफलता प्राप्त नहीं हुई। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटों में से केवल पांच सीटों पर ही विजेता प्रत्याशी 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त कर सके, जबकि केरल में 20 में से केवल चार विजेता प्रत्याशी ही कुल मतदान के 50 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त कर सके। महाराष्ट्र की स्थिति बेहतर रहीं। वहां लोकसभा के 48 सदस्यों में से 15 सदस्य कुल मतदान के 50 प्रतिशत से अधिक मतों के अंतर से विजयी रहे।
इसके विपरीत पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उड़ीसा ने अपने यहां आधे से अधिक सीटों पर 50 प्रतिशत से अधिक के अंतर से वोट पाने वाले सदस्य लोकसभा में भेजे। (पश्चिम बंगाल ने 42 में से 23, राजस्थान ने 25 में से 14 और उड़ीसा ने 21 में से 11)। तथापि गुजरात और मध्य प्रदेश इस मामले में थोड़े पिछड़ गए। उन्होंने ऐसे क्रमश: 26 में से 12 और 29 में से 13 सदस्य ही लोकसा में भेजे।
जहां तक अनुपातिक दृष्टि से कम सीटों वाले राज्यों का संबंध है, असम ने अपने 14 सांसदों में से केवल एक सांसद ही ऐसा भेजा जिसने 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किए थे जबकि इतनी ही सीटों वाले झारखंड ने ऐसे तीन सांसद भेजे और पंजाब ने 13 में से ऐसे तीन सांसद भेजे।
हरियाणा में 10 में से केवल एक ही विजेता प्रत्याशी 50 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त कर सका। इसके विपरीत दिल्ली ही एक मात्र ऐसा केन्द्र शासित प्रदेश था जहां सातों सांसदों ने 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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