पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

गुरुवार से शुरू हुए विरोध मार्च को रोकने के लिए सरकार ने हरसंभव कोशिश की है.
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अली अहमद कुर्द का कहना है कि वकीलों ने क्षेत्रीय केंद्रों से अपने मार्च को रोक दिया था लेकिन लोगों से अपील की गई थी कि अन्य साधनों से वे रैली में शामिल होने के लिए पहुँचे.
अली अहमद कुर्द के काफ़िले को सिंध प्रांत में घुसने से रोक दिया गया. पुलिस ने सैकड़ों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वकीलों को हिरासत में ले लिया है.
मांग
प्रदर्शनकारी वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासनकाल में बर्ख़ास्त किए गए जजों की बहाली की मांग कर रहे हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ का कहना है कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने इसका वादा किया था लेकिन उन्होंने इस पर कार्रवाई नहीं की.
इस बीच सूबा सरहद में भी अधिकारियों ने राजनीतिक सभा और विरोध मार्च पर पाबंदी लगा दी है. यहाँ बड़ी संख्या में वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
सरकार का कहना है कि ये विरोध मार्च देश को अस्थिर करने के लिए है. पाकिस्तान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी चिंता जताई है.
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक और ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से बात की है.
कार्यक्रम
जजों की बहाली की अपनी मांग को लेकर चार दिनों के विरोध मार्च का आयोजन किया गया है. इसके बाद राजधानी इस्लामाबाद में संसद के बाहर धरना देने की योजना है.
प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई हुई है
लेकिन इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता सैयद शोएब हसन का कहना है कि भले ही प्रदर्शन चल रहे हैं और छोटे-छोटे समूहों में लोग इस्लामाबाद पहुँचने की कोशिश भी कर रहे हैं.
लेकिन सरकार की कार्रवाई के कारण 'लौंग मार्च' तो रुक ही गया है. विरोध मार्च के आयोजकों का कहना है कि एक हज़ार से ज़्यादा विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को या तो जेल भेज दिया गया है या वे नज़रबंदी में रखे गए हैं.
पुलिस ने गुरुवार रात सूबा सरहद में बड़ी संख्या में वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया है. पुलिस की कार्रवाई जारी है. पंजाब और सिंध प्रांत में भी राजनीतिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.


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