क्या लिट्टे अपने सैन्य प्रवक्ता को मौत के घाट उतार चुका है?
नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। श्रीलंका का तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(लिट्टे) इस वर्ष के आरंभ में तकलीफों से घिरने के बाद ही संभवत: अपने सैन्य प्रवक्ता पर 'गद्दारी' का आरोप मढ़ते हुए उसे मौत के घाट चुका है। यह जानकारी तमिल सूत्रों ने दी है।
तमिल हलकों में महीने भर से ऐसी अटकले लगाई जा रही हैं कि इरासिहा इलनथिरायन उर्फ मार्शल को मारा जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि संभवत: जनवरी में ही ऐसा किया गया।
लिट्टे की ओर से इलनथिरायन के बारे में कोई में कोई भी टिप्पणी नहीं की गई है। लिट्टे से हमदर्दी रखने वाले मीडिया में भी कुछ महीनों से उसका कोई जिक्र नहीं है।
अंग्रेजी और तमिल का ज्ञान रखने वाला इलनथिरायन वर्ष 2008 के अंत में श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में मौजूद था, जब सरकार ने लिट्टे के खिलाफ जबरदस्त अभियान छेड़ा। इस अभियान की वजह से लिट्टे को उन स्थानों से हटना पड़ा, जहां वर्षो से उनका कब्जा था।
तमिल कार्यकर्ताओं ने श्रीलंका से आईएएनएस को फोन पर बताया कि इलनथिरायन पर श्रीलंकाई खुफिया विभाग के साथ संबंध रखने और लिट्टे के खिलाफ साजिश रचने का आरोप था। लिट्टे की खुफिया इकाई ने संभवत: उसे मार गिराया।
बेहद गोपनीय ढंग से गतिविधियां चलाने वाले लिट्टे में इलनथिरायन अगस्त 2006 से मीडिया के लिए महत्वपूर्ण स्रोत था। उन दिनों सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में झड़पे तेज हो गई थीं।
इलनथिरायन ने श्रीलंकाई और विदेशी पत्रकारों के साथ संपर्क बनाए थे। कई बार तो वह उनसे दोस्ताना और अनौपचारिक बातचीत भी करता था। वह लिट्टे समर्थक तमिल नेशनल एलायंस के सांसदों के भी संपर्क में था। इनमें से किसी भी सांसद से कुछ महीनों से उसने संपर्क नहीं साधा है।
वह सैन्य मसलों से जुड़े प्रश्नों के अलावा भी पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देता था। उससे फोन पर तथा ई-मेल के जरिए संपर्क किया जा सकता था।
नवंबर 2007 में श्रीलंका की राजनीतिक शाखा के प्रमुख एस.पी. तमिलसेल्वम की मौत के बाद बी. नादेसन की नियुक्ति की घोषणा भी इलनेथिरायन ने ही की थी। उसने मई 2008 में आखिरी बड़ी घोषणा की थी। उसने दावा किया था कि मन्नार के संघर्ष में 30 श्रीलंकाई सैनिक मारे गए हैं और सेना के हथियार जब्त कर लिए गए हैं।
वर्ष 1976 में गठन के बाद से ही लिट्टे कई तमिलों को धोखेबाजी के आरोप में मौत के घाट उतारता आया है।
अगस्त 1993 में संगठन के दूसरे प्रमुख सदस्य महात्तया को भारत का जासूस होने के आरोप में लिट्टे ने कैद कर लिया था। उसे दिसंबर 1994 में मार दिया गया। लिट्टे अपने सदस्यों को सीमा से अधिक बाहरी दुनिया के लोगों से मेल-जोल की इजाजत नहीं देता। जिन्हें बाहरी लोगों से मेल-जोल की इजाजत है उन पर पैनी नजर रखी जाती है।
कोई भी ऐसी गतिविधि जिसे लिट्टे में गद्दारी समझा जाता है, उसे ना तो भुलाया जाता है और ना ही बख्शा जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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