आखिर कहां गए ज़रदारी

ज़रदारी कल ईरान में थे, लेकिन आज भी वे वहीं हैं या पाकिस्तान लौट आए हैं इस बारे में कोई खबर नहीं। मीडिया में यहां तक चर्चा है कि सेना ने ज़रदारी को पद से हटाकर प्रधानमंत्री गिलानी को सत्ता- प्रमुख बना दिया है।
प्रधानमत्री गिलानी और सेना प्रमुख कियानी की बढ़ती नज़दीकियों के कारण भी इन चर्चाओं को बल मिल रहा है। सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज़ कयानी ने बुधवार रात गिलानी से मुलाकात की है।
पाकिस्तान के हालात पर अमेरिका भी पूरी नजर रखे हुए है। अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड होलब्रुक ने भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी से बात की है। इस सारे घटनाक्रम में जरदारी को साइडलाइन करने के संकेत मिल रहे हैं।
दूसरी तरह नवाज शरीफ लॉन्ग मार्च पर डटे हुए हैं। पाक सरकार भी कठोर कार्रवाई करते हुए धरपकड़ अभियान चला रही है। पाकिस्तानी सूचना मंत्री शेरी रहमान ने यह कहकर सरकार के धरपकड़ अभियान की वकालत की है कि नवाज शरीफ और उनके भाई तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ द्वारा बार-बार किए जा रहे के आह्वान के चलते कोई और विकल्प नहीं बचा है। इस दौरान ज़रदारी का कोई बयान सामने नहीं आया है।
पाकिस्तानी संचार माध्यमों में जरदारी के ठिकाने के लेकर विरोधाभासी खबरें आ रही हैं। कुछ में कहा जा रहा है कि जरदारी पाकिस्तान में ही हैं, जबकि कुछ खबरें ऎसी हैं कि जरदारी पाकिस्तान से बाहर किसी देश में हैं लेकिन कहां, यह किसी को ज्ञात नहीं ।
जरदारी के पाकिस्तान में नहीं होने की पुष्टि इस बात से भी होती है कि गुरुवार को पाक में जितनी भी उच्चस्तरीय मुलाकातें हुईं उनमें जरदारी का नाम कहीं नहीं आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक ने प्रधानमंत्री गिलानी से फोन पर बातचीत की। इसी तरह पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत एनी पैटर्सन ने भी जरदारी-विरोधी नेता नवाज शरीफ से मुलाकात की है, लेकिन जरदारी से उनके बात करने की कोई खबर नहीं है।


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